रायगढ़ जिले में कोयला उत्पादन और बिजली आपूर्ति से जुड़ी चार प्रमुख औद्योगिक परियोजनाओं को संरक्षित और प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी मयंक चतुर्वेदी ने छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 की धारा 25, 26 और 28 के तहत यह सख्त आदेश जारी किया है। यह फैसला अडानी पावर, एनटीपीसी माइनिंग, एसईसीएल और जिंदल पावर की परियोजनाओं पर लागू होगा।
प्रशासनिक अधिकारियों की जांच रिपोर्ट और कंपनियों से प्राप्त आवेदनों के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। आदेश का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा, निर्बाध कोयला उत्पादन और प्रमुख औद्योगिक ढांचों का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करना है।
जारी आदेश के मुताबिक अडानी पावर लिमिटेड के छोटेभंडार, बड़ेभंडार, अमलीभौना और सरवानी स्थित ऊर्जा संयंत्र और संपूर्ण परियोजना क्षेत्र को दायरे में लिया गया है। वहीं घरघोड़ा तहसील स्थित एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड की तलाईपल्ली परियोजना की खदानों, कोल हैंडलिंग प्लांट, रेलवे साइडिंग और टाउनशिप सहित पूरे क्षेत्र को संरक्षित किया गया है।
एसईसीएल छाल ओपनकास्ट माइंस के छह प्रमुख परिसरों—साइलो, रेलवे साइडिंग, कोल स्टॉक और वर्कशॉप को प्रतिबंधित क्षेत्र बनाया गया है। इसके अतिरिक्त जिंदल पावर लिमिटेड की गारे पेलमा IV/1, IV/2, 3 और IV/6 खदानों, 3400 मेगावाट तमनार पावर प्लांट, डोंगामहुआ कैप्टिव प्लांट और कन्वेयर कॉरिडोर को भी इस सुरक्षा दायरे में शामिल किया गया है।
अब इन सभी क्षेत्रों में बिना वैध पहचान पत्र या अनुमति पत्र के प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। बिना लिखित अनुमति के धरना-प्रदर्शन, सभा, जुलूस, चक्काजाम और नारेबाजी पर रोक लगा दी गई है। साथ ही कैमरा, रिकॉर्डिंग उपकरण, वायरलेस सेट और ज्वलनशील पदार्थ ले जाने पर भी पाबंदी रहेगी। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।








