रायगढ़ (क्राइम डेस्क)। आप टीवी पर ‘लाइव’ मैच देखकर अपनी किस्मत आज़मा रहे होते हैं, और सट्टेबाज आपसे 5 सेकंड आगे का ‘भविष्य’ देखकर आपकी जेब खाली कर रहे होते हैं! रायगढ़ पुलिस ने ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे के एक ऐसे हाई-टेक सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसका मास्टरमाइंड एक B.Tech सॉफ्टवेयर इंजीनियर निकला।
यह इंजीनियर अपने लैपटॉप और कोडिंग के दिमाग से सट्टेबाजी का ऐसा सॉफ्टवेयर चला रहा था, जो टीवी प्रसारण से 5 सेकंड पहले ही मैच का नतीजा बता देता था।
क्या है सट्टे का यह ‘5 सेकंड’ वाला खेल? (समझिए आसान भाषा में) मैदान पर जब बॉलर गेंद फेंकता है और वह आपके घर के टीवी तक पहुंचती है, तो बीच में सैटेलाइट के कारण 5 से 7 सेकंड की देरी (Delay) होती है। न्यू शंकरनगर का रहने वाला 28 साल का सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदर्श कुमार केशरी इसी ‘देरी’ का फायदा उठाता था।

उसने और उसकी टीम ने ‘Winbigpro’ नाम से एक ऐसा सॉफ्टवेयर और वेबसाइट बनाई, जो ग्राउंड का रियल-टाइम डेटा टीवी से 5 सेकंड पहले ही सट्टेबाजों की स्क्रीन पर फ्लैश कर देती थी। यानी टीवी पर बॉल फेंके जाने से पहले ही सटोरियों को पता चल जाता था कि इस गेंद पर छक्का लगेगा या विकेट गिरेगा! इसे ‘बॉल-टू-बॉल सट्टा’ कहते हैं, जिसमें हारने का कोई चांस ही नहीं होता।
दिल्ली का जॉब, नोएडा के दोस्त और 20% का कमीशन आदर्श कोई मामूली सटोरिया नहीं है। वह दिल्ली की एक नामी IT कंपनी में काम करता था। अक्टूबर 2025 में उसकी सेटिंग नोएडा की IT कंपनियों में काम करने वाले रायपुर और बिहार के दो दोस्तों से हुई। इन्होंने मिलकर अपनी इंजीनियरिंग का दिमाग सट्टेबाजी के काले कारोबार में लगा दिया।
आदर्श का काम सिर्फ आईडी (ID) बनाना नहीं था। वह सट्टेबाजों के पैसे जमा करने (Payment) और निकालने (Withdrawal) का पूरा टेक्निकल मैनेजमेंट देखता था। इसके बदले उसे इस करोड़ों के खेल में सीधा 20% का भारी-भरकम कमीशन मिलता था।
साइबर पुलिस का छापा और धरा गया मास्टरमाइंड रायगढ़ में SSP शशि मोहन सिंह के ‘ऑपरेशन अंकुश’ के तहत साइबर पुलिस (CSP मयंक मिश्रा की टीम) इस नेटवर्क को ट्रैक कर रही थी। जब पुलिस को भनक लगी कि न्यू शंकरनगर में शीतला मंदिर के पास घर में बैठकर एक युवक यह पूरा सर्वर चला रहा है, तो साइबर थाना प्रभारी विजय चेलक की टीम ने दबिश दी।
पुलिस को देखते ही आदर्श भागने लगा, लेकिन घेराबंदी करके उसे धर दबोचा गया। उसके पास से दो महंगे मोबाइल (सैमसंग S23 और वनप्लस) और सट्टे का पूरा इलेक्ट्रॉनिक डेटा बरामद हुआ है। हालांकि, उसका मुख्य हथियार (HP कंपनी का लैपटॉप) अभी दिल्ली वाले फ्लैट में छिपा है।
क्या है आगे का एक्शन? आदर्श को आईटी एक्ट (IT Act) और जुआ एक्ट के तहत गिरफ्तार कर जेल (रिमांड) भेज दिया गया है। पुलिस अब इसके फोन कॉल्स और डेटाबेस के जरिए दिल्ली, नोएडा, भिलाई और बिलासपुर में बैठे उन सफेदपोश सटोरियों की कुंडली खंगाल रही है, जो इस ‘5 सेकंड’ वाले सॉफ्टवेयर से करोड़ों कूट रहे थे।
देखा जाये तो सट्टा अब गली-नुक्कड़ की पर्चियों से निकलकर सॉफ्टवेयर और हैकिंग के ‘डार्क वेब’ तक पहुंच चुका है। रायगढ़ पुलिस की यह कार्रवाई उन युवाओं के लिए भी एक सबक है, जो अपनी डिग्रियों और टेक्निकल टैलेंट को शॉर्टकट से अमीर बनने के चक्कर में बर्बाद कर रहे हैं।



