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नई सरकार के साथ फिर उठा झीरम घाटी जांच का मुद्दा! पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने की जांच की अपील! नए सीएम ने कहा- ‘पांच साल तक क्यों नही..’

रायगढ़। छत्तीसगढ़ में नई सरकार बनने के साथ-साथ झीरम घाटी हत्याकांड का मुद्दा एक बार फिर उठा है। खरसिया विधायक और पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल ने नवगठित सरकार से झीरम घाटी हत्या कांड की जांच करने की मांग की हैं।

इस पर छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री विष्णु देव का बयान आया है कि

“उनकी सरकार ने पिछले 5 सालों में इसकी जांच क्यों नहीं की? उनके मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तो कहते थे कि झीरम घाटी हत्याकांड के सारे सबूत उनके जेब में है.. अगर ऐसा हैं तो अपने शासनकाल में जांच क्यों नहीं किये।”

इस पर पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने कहा कि

“वे राजनीति से हटकर नई सरकार से इस कांड की जांच करने की मांग कर रहे हैं। हमारी सरकार द्वारा इसकी जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी। जांच के बिंदु भी तय कर लिए गए थे मगर केंद्रीय जांच एजेंसी के द्वारा हाई कोर्ट में आपत्ति दर्ज की गई थी। जिसके बाद स्टेट पुलिस की जांच पर स्टे लग गया था। इसके बाद हमने सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी और अब सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को जांच की अनुमति दे दी है। दुर्भाग्य से हमारी सरकार के 5 साल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले में ही निकल गए। अब जब सुप्रीम कोर्ट का आदेश आ गया है और किसी प्रकार का कोई व्यवधान नहीं है तो नई सरकार को भी इसकी गंभीरता पूर्वक जांच करवानी चाहिए।”

क्या हुआ था

दरअसल छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा कहा गया था कि सरकार पिछले सरकार की सभी घोटालों की जांच कराएगी। इस पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री एवं खरसिया विधायक उमेश पटेल द्वारा नई सरकार से झीरम घाटी हत्याकांड की जांच की मांग गई। आपको बता दे कि 25 मई 2013 नक्सलियों द्वारा किए गए इस झीरम घाटी हत्याकांड कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह से खत्म हो गया था। जिसमें 33 लोगों की मौत हुई थी। जिन्हें शहीद का दर्जा दिया गया। उसमें उमेश पटेल के पिता एवं तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल और उनके बड़े भाई की भी मौत हुई थी।

कांग्रेस की सरकार बनने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल ने इस मामले 4 साल पहले कहा कि

“उनकी सरकार पिछले चार महीने से गृह मंत्रालय से इस संबंध में संपर्क कर रही है. हमने केंद्र को यह भी बताया कि केंद्रीय जांच एंजेंसी ने बिना जांच पूरी हुए ही इसे समाप्त कर दिया. साथ ही इस बात से भी आगाह किया कि एनआईए ने हत्या की साजिश के एंगल से जांच नहीं की. गृह मंत्रालय ने यह कहते हुए जांच सौंपने से इनकार कर दिया कि ऐसा करना उचित नहीं है क्योंकि जांच अब भी जारी है. ऐसे में राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी जांच शुरू नहीं कर पा रही है. बघेल ने कहा कि केस में नया सबूत मिला है इसलिए हम दोबारा जांच चाहते हैं. पिछले 6 साल में सबूतों को नष्ट किया गया है.”

नक्सली हमला 2013 में क्या हुआ था नुकसान

आपको बता दें कि 25 मई 2013 को बस्तर के झीरम घाटी में नक्सलियों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर ताबड़तोड़ हमला कर 35 नेताओं और कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतार दिया था. इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा, पूर्व विधायक उदय मुदलियार को नक्सलियों ने अपना निशाना बनाया था

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