रायगढ़। जिला भाजपा की राजनीति इन दिनों सोशल मीडिया के अखाड़े में चल रही है। सोशल मीडिया के इस दंगल के पहलवान दो पूर्व अध्यक्ष है.. जिसमें भारतीय जनता पार्टी के पूर्व युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत है, और दूसरी तरफ पूर्व जिला अध्यक्ष उमेश अग्रवाल ! उमेश के सहयोगी खिलाड़ी है, वर्तमान भाजपा के प्रवक्ता गणेश अग्रवाल और सह प्रवक्ता अशोक अग्रवाल! उधर रवि भगत अकेले ही सब पर भारी पड़ रहे हैं और पब्लिक इस दंगल का मजा ले रही है।
शुरुआत सिर्फ व्यक्तिगत टीका टिप्पणी तक सीमित था। लेकिन अब एक दूसरे की औकात नापी जा रही है! हां, सही सुन रहे हैं “औकात..”! एक दूसरे की पत्नियों की योग्यता भी बारीकी से देखी जा रही है। मंत्री ओपी चौधरी भी रडार में आ गए है। मामला सिर्फ भाजपा के अंतर्कलह तक सीमित नहीं था, अब उसने कांग्रेस के नेताओं की भी योग्यता और औकात नापनी शुरू हो गई है।
दंगल की शुरुआत
कहानी की शुरुआत 19 अगस्त से होती है, जब पूर्व जिला भाजपा अध्यक्ष उमेश अग्रवाल ने अपने फेसबुक पेज पर एक सार्वजनिक पोस्ट डालकर दैनिक भास्कर में छपी जीएसटी छापे से जुड़ी खबर को झूठा और भ्रामक करार दिया था। उन्होंने कड़े शब्दों में इसका खंडन किया था और अखबार को तीन दिनों के भीतर माफी छापने की चेतावनी दी थी।

उस वक्त मामला जैसे आया था, वैसे ही शांत भी हो गया था। ठीक एक महीने बाद, 17 सितंबर को बागी हो चुके पूर्व भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत ने पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष उमेश अग्रवाल के उसी पुराने पोस्ट को अपनी टाइमलाइन पर साझा कर दिया। साथ में एक बेहद सीधा सवाल दाग दिया कि क्या दैनिक भास्कर ने खंडन छापा या नहीं, यह उन्हें पढ़ने को नहीं मिला।

इसी पोस्ट के कमेंट में उन्होंने एक चुनौती भी दे डाली कि अगर कोई खंडन छपा है तो दिखा दिया जाए, वे सार्वजनिक रूप से क्षमा मांग लेंगे। यह सवाल देखने में जितना साधारण लगता है, इसने भाजपा खेमे में इसने उतनी ही बड़ी हलचल मचा दी और यहीं से यह विवाद आरोप प्रत्यारोप की गलियों में उतर गया।
औकात…?
रवि भगत का सवाल पोस्ट होते ही सबसे पहले गणेश अग्रवाल ने रवि भगत को संबोधित करते हुए एक पोस्ट डाली। इसके तुरंत बाद उमेश अग्रवाल ने गणेश अग्रवाल की इसी पोस्ट को शेयर करते हुए तीखी टिप्पणी लिखी कि
“स्वार्थ से भरी महत्वाकांक्षा और कुंठित मानसिकता ही रवि भगत को ले डूबी, वरना पार्टी ने तो उन्हें उनकी औकात से कहीं ज्यादा मान सम्मान दिया था। रवि भगत ने भी पलटकर लिखा कि उनकी औकात और हैसियत क्या है, यह रायगढ़ की जनता बखूबी जानती है।”


दंगल में भाजपा के दोनों प्रवक्ताओं गणेश अग्रवाल और सह प्रवक्ता अशोक अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष उमेश अग्रवाल के सहयोगी के रूप में उतरे और आदिवासी नेता रवि भगत को घेरना शुरू किया।
घाव पर मक्खी और पत्नी को अध्यक्ष..
अपनी पोस्ट में गणेश अग्रवाल ने तंज कसा कि घाव पर मक्खी बैठकर उसे कुरेदने का ही काम करती है। गणेश अग्रवाल ने रवि भगत की पत्नी को जिला पंचायत अध्यक्ष न बनाए जाने का मुद्दा उठाते हुए उनकी योग्यता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने रवि के उस पुराने पोस्ट का हवाला भी दिया, जिसमें रवि ने खुद लिखा था कि
“माफ करना, अध्यक्ष नहीं बनवा पा सका, भाजपा के सिस्टम के आगे हार गया।”
अपनी पोस्ट में गणेश अग्रवाल ने रवि भगत के जीवन की एक निजी और संवेदनशील घटना, आत्महत्या के प्रयास का भी जिक्र किया, जिस पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने तीखी आपत्ति जताते हुए इसे मर्यादा और शालीनता की सीमा लांघने वाला कदम बताया।
अशोक अग्रवाल का वो कीचड़ वाला पोस्ट
इस पूरे विवाद में भाजपा प्रवक्ता अशोक अग्रवाल ने आक्रामक रुख अपनाते हुए रवि भगत की कीचड़ से सनी एक पुरानी तस्वीर पोस्ट की। उन्होंने लिखा कि इस तस्वीर में सिर्फ कपड़े ही कीचड़ से सने नहीं हैं, बल्कि पूरी आत्मा कीचड़युक्त हो गई है। उन्होंने भी रवि भगत को खुली चुनौती दी कि वे अपनी पत्नी की वह योग्यता साबित करें जिसके आधार पर उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए था।

जब प्रदेश अध्यक्ष था तब भालू बोलते थे ये लोग..
इन तमाम हमलों के जवाब में रवि भगत ने अपनी एक विस्तृत पोस्ट और कमेंट बॉक्स में चौतरफा पलटवार किया। अपनी झल्लाहट और बेबसी को बेहद ठेठ और तीखे शब्दों में बयां करते हुए रवि भगत ने लिखा कि
“जो अपनी पत्नी के हक़ के लिए नहीं लड़ सका, वह किसी और के लिए घंटा लड़ेगा।”
अपने ऊपर किए गए औकात वाली बात को भी काफी गंभीरता से लिया और उन्होंने उनका कहना है कि
“आदिवासी होने के नाते उनकी औकात नापी जा रही है, उन्होंने तो यह भी कहा कि जब मैं युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष था तो लोग यही लोग मुझे भालू बोलते थे।”

नापे जाने लगी एक दूसरे की ‘औकात’
इसके साथ ही उन्होंने खरसिया के एक कांग्रेस नेता का सीधा जिक्र करते हुए व्यवस्था पर कड़ा तंज कसा। रवि भगत ने लिखा कि
खरसिया का एक व्यक्ति कांग्रेस से आकर रातों रात भाजपा में शामिल होता है और उसकी पत्नी को जिला पंचायत अध्यक्ष बना दिया जाता है, जबकि वे खुद जन्मजात भाजपाई होकर भी अपनी पत्नी के लिए यह पद नहीं पा सके।
पत्नियों की योग्यता
रवि भगत ने अशोक अग्रवाल से सीधे पूछ लिया कि आपकी क्या योग्यता थी कि आपको पार्टी का प्रवक्ता बनाया गया। उन्होंने पत्नी की योग्यता पर जवाब दिया कि वे जनपद सदस्य रह चुकी हैं और विपक्ष के हर आंदोलन में शामिल रहती आई हैं।
अपनों की नसीहत और आयातित होने की मुहर
इसी बीच भाजपा के भीतर सुलग रही मूल बनाम आयातित कार्यकर्ताओं की बहस पर मुहर लगाते हुए भाजपा नेता विंकल छाबड़ा का एक अहम कमेंट भी सामने आया। विंकल ने रवि भगत को नसीहत देते हुए लिखा कि
“गलती कुछ तुम्हारी भी है रवि भाई, चलो ये गणेश अशोक लोग तो अभी कांग्रेस से आए हैं तो उनके लिए कुछ बोलो तो समझ आता है। विंकल ने पूर्व जिलाध्यक्ष उमेश अग्रवाल का बचाव करते हुए उन्हें एक सीनियर और शानदार नेता बताया, जिन्होंने कभी निजी वार नहीं किया था। L”
विंकल का यह कमेंट इस बात का खुला प्रमाण बन गया कि पार्टी के भीतर भी गणेश और अशोक अग्रवाल को बाहरी और कांग्रेसी पृष्ठभूमि का माना जा रहा है, जिससे भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी पूरी तरह सतह पर आ गई है।

ओपी चौधरी की भी आए लपेटे में
यह सोशल मीडिया घमासान तब एक बेहद विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गया, जब रवि भगत ने सीधे तौर पर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी की खरसिया चुनाव में हुई हार की दुखती रग पर हाथ रख दिया। कमेंट बॉक्स में अशोक अग्रवाल ने जब जिला पंचायत अध्यक्ष चयन में क्षेत्रीय संतुलन का हवाला दिया, यानी रायगढ़ में मंत्री और लैलूंगा में राज्यसभा सांसद होने की दलील दी, तो रवि भगत ने तीखा पलटवार किया। रवि भगत ने तंज कसते हुए लिखा कि
“मतलब आप प्रमाणित कर रहे हो कि खरसिया की जनता ने ओपी चौधरी को हरा दिया, इस खीज से ओपी चौधरी खरसिया के भाजपा कार्यकर्ताओं की सुनते नहीं हैं।“

रवि ने आगे कटाक्ष किया कि इसीलिए वहां से जिला पंचायत अध्यक्ष की नियुक्ति जरूरी थी, ताकि लोग अपनी बात रख सकें क्योंकि बड़े आदमी के पास तो बात नहीं रख पाते हैं।
रवि भगत का यह बयान सीधे तौर पर सत्ता के शीर्ष केंद्र पर प्रहार था और यह बता रहा था कि यह लड़ाई सिर्फ स्थानीय नेताओं से नहीं, बल्कि ओ.पी. चौधरी के सिस्टम से है। इस प्रहार के बचाव में अशोक अग्रवाल को यह कहना पड़ा कि
ओ.पी. चौधरी पूरे प्रदेश के नेता हैं और रवि भगत का अहंकारी स्वभाव उनके विकास कार्यों को स्वीकार नहीं कर पा रहा है।

कांग्रेसियों की एंट्री
अशोक अग्रवाल की उस पोस्ट का कमेंट बॉक्स जल्द ही जनता, सोशल मीडिया यूजर्स और विपक्षी दलों के लिए एक खुला मैदान बन गया। कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष सलीम नियारिया ने अशोक अग्रवाल के दलबदल के इतिहास पर कटाक्ष करते हुए लिखा कि सवाल करने वाले पहले यह बताएं कि वे खुद पहले कहां थे।
इसी पब्लिक ट्रायल में कांग्रेस नेता विकास शर्मा और आशीष चौबे ने भी बहती गंगा में हाथ धोते हुए अशोक अग्रवाल की जमकर घेराबंदी की।
विकास शर्मा ने दलबदल की राजनीति पर करारा प्रहार करते हुए लिखा कि यह बात तो सभी दल बदल वालों पर भी लागू होती है, कल तक कांग्रेस अच्छी, आज बीजेपी अच्छी, परसों कोई और।
इस तंज को आगे बढ़ाते हुए आशीष चौबे ने तल्ख टिप्पणी कर चेतावनी दे डाली कि इस बार कांग्रेस में दलबदलुओं को वापस नहीं आने देंगे, जो जो भी पार्टी छोड़कर गया है।
सूरज तिवारी Vs अरुण मालाकार
इसी बीच कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति का जिक्र करते हुए अशोक अग्रवाल ने योग्यता के मुद्दे पर खरसिया के कांग्रेस नेता सूरज तिवारी का नाम घसीट लिया। उन्होंने तंज कसा कि सूरज तिवारी जैसे योग्य व्यक्ति के रहते कांग्रेस ने अरुण मालाकार को जिलाध्यक्ष क्यों बनाया था।
इस पर यूजर धीरज बाहिदार ने एक पुरानी अखबार की कतरन चिपका दी, जिसमें खुद अशोक अग्रवाल कांग्रेस में रहते हुए तत्कालीन रमन सरकार को कमीशनखोरी के लिए घेरते नजर आते हैं। बौखलाकर अशोक अग्रवाल ने पूर्व जिलाध्यक्ष अरुण मालाकार के लिए दोयम दर्जे का चाटुकार जैसे कड़े शब्दों का इस्तेमाल कर डाला।
इसके अलावा डोरीलाल चौहान नामक यूजर ने अशोक अग्रवाल पर अंधभक्ति का तंज कसते हुए लिखा कि वे ओ.पी. चौधरी के इतने बड़े समर्थक हैं कि नीम के पत्ते को भी आम का पेड़ बता देंगे।

सिस्टम और मैनेजमेंट पर उठा सबसे तीखा सवाल
इस पूरी बहस के बीच उमेश अग्रवाल ने एक और तीखा बैनर पोस्ट करते हुए लिखा कि जब पद की लोलुपता खुद सिर पर चढ़कर तांडव करने लगे तो अंजाम रवि भगत जैसा ही होता है। इसके जवाब में रवि भगत ने एक संक्षिप्त लेकिन तीखी टिप्पणी लिखी कि इस पूरे मामले में दो ही बातें हो सकती हैं, या तो दैनिक भास्कर की वह खबर झूठी थी या फिर सरकार ने पूरे मामले को मैनेज कर लिया है। इस तरह उन्होंने सीधे प्रशासनिक व्यवस्था को ही कटघरे में खड़ा कर दिया।

खुली किताब बन चुकी है रायगढ़ भाजपा की भीतरी सियासत
एक साधारण से सवाल से शुरू हुई यह लड़ाई आज रायगढ़ की राजनीति के सबसे चर्चित और सबसे कड़वे अध्यायों में शुमार हो चुकी है। पार्टी से बाहर जा चुके एक प्रभावशाली आदिवासी नेता का यह दर्द और ओ.पी. चौधरी के सिस्टम के इर्द गिर्द सिमटी भाजपा नेताओं की यह बौखलाहट आने वाले दिनों में संगठन के लिए कई चुनौतियां खड़ी कर सकती है। रायगढ़ की जनता अब सिर्फ तमाशबीन नहीं रही, वह हर पोस्ट और हर कमेंट पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। यह विवाद अब सिर्फ नेताओं की निजी लड़ाई न रहकर रायगढ़ भाजपा की आंतरिक सेहत का आईना बन गया है।
नीचे फेसबुक पोस्ट और कमेन्ट में देखें


कांग्रेस से भाजपा आये बीजेपी प्रवक्ता अशोक अग्रवाल के पोस्ट पर जमकर खींचातानी
इसी पोस्ट के नीचे के कमेंट




अब यहां पर कांग्रेस नेता सलीम चुटकी लेते हुए

कांग्रेस नेता विकास शर्मा और आशीष चौबे ने भी बहती गंगा में हाथ धोया


सोशल मीडिया यूजर सुभाष चौधरी भी चुटकी लेते नजर आए

सारंगढ़ के नेताओं ने भी अशोक अग्रवाल को पिंच किया

इन सब से भड़के अशोक ने अरुण मालाकार को दोयम दर्जे का कहा, तो धीरज ने अशोक दोहरे मापदंड को लेकर कांग्रेस कार्यकाल पेपर कतरन अपलोड कर दिया

उमेश अग्रवाल को डिफेंड करने के लिए गणेश अग्रवाल ने एक लंबा चौड़ा पोस्ट किया

आप इसी पोस्ट पर देखिए रवि भगत और गणेश अग्रवाल कन्वर्सेशन के कुछ स्क्रीनशॉट


इस रिपोर्ट में उल्लेखित सभी बयान और टिप्पणियां संबंधित नेताओं की सार्वजनिक फेसबुक पोस्ट और कमेंट पर आधारित हैं, जिनके स्क्रीनशॉट उपलब्ध हैं।









