रायगढ़। 41वें चक्रधर समारोह-2026 की चौथी सांस्कृतिक संध्या शास्त्रीय नृत्य कथक के विविध रंगों और रायगढ़ घराने की समृद्ध परंपरा के नाम रही। इस शाम स्थानीय प्रतिष्ठित संस्था रिदम कल्चरल सेंटर के कलाकारों, शास्त्रीय नृत्यांगना लिली चौहान, रायगढ़ घराने की नृत्यांगना शिल्पा सिंह और बिलासपुर की शिव शक्ति कला संस्था के कलाकारों ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

समारोह की चौथी शाम का आरंभ रायगढ़ की संस्था रिदम कल्चरल सेंटर की ‘लाइव कथक’ प्रस्तुति के साथ हुआ। कलाकारों ने कथक की पारंपरिक लय, ताल, तकनीक और भाव-अभिव्यक्ति का समन्वय प्रस्तुत किया। प्रस्तुति की शुरुआत शिव स्तुति से हुई, जिसे तीनताल और कहरवा ताल में पिरोया गया था। इसके बाद आमद, तोड़ा, चक्करदार तोड़ा, परन, तिहाई और शास्त्रीय बोलों के जरिए तीनताल में बंधी लयकारी को मंच पर उतारा गया।

गुरु जेनिफर जोसेफ के निर्देशन में हुई इस प्रस्तुति में अनुप्रिया जायसवाल, सान्वी ठाकुर, नंदिनी स्वर्णकार, अस्मि ईला स्वर्णकार, गुंजन यादव, तनुमजूमदार, आद्या मेहर और तन्वी देवांगन ने नृत्य किया। वहीं संगीत संगति में गुरु देव चौहान, गुरु देवेंद्र उपाध्याय, आयुष सिंह, आश्रा चौहान, जीत उपाध्याय और हरि शंकर देवांगन शामिल रहे। वर्ष 2013 से संचालित यह संस्था जॉली मुखर्जी के निर्देशन और संस्थापिका सुप्ति मुखर्जी के मार्गदर्शन में काम कर रही है।
लिली चौहान और शिल्पा सिंह की शास्त्रीय प्रस्तुतियां
सांस्कृतिक संध्या में कथक और भरतनाट्यम में प्रशिक्षित नृत्यांगना लिली चौहान ने मंच संभाला। उन्होंने अपनी प्रस्तुति में शास्त्रीय नृत्य की तकनीकी बारीकियों और भाव-भंगिमाओं का प्रदर्शन किया। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से कथक में शोध कर रहीं लिली चौहान दूरदर्शन केंद्र रायपुर की ‘बी’ ग्रेड कलाकार और छत्तीसगढ़ शासन की ‘चिन्हारी’ योजना में पंजीकृत हैं।

इसके उपरांत रायगढ़ घराने की कथक नृत्यांगना शिल्पा सिंह ने परन, तोड़ा, लयकारी और भावपूर्ण अभिनय से सजी प्रस्तुति दी। पं. सुनील वैष्णव, वासंती वैष्णव और गुरु महुआ शंकर की शिष्या शिल्पा सिंह ‘मां कात्यायनी कथक डांस एकेडमी’ की संस्थापक हैं। उन्होंने रायगढ़ घराने की पारंपरिक शैली को मंच पर प्रस्तुत कर दर्शकों की सराहना बटोरी।

शिव शक्ति कला संस्था ने गणेश वंदना और तराना से बांधा समां
कार्यक्रम में बिलासपुर की शिव शक्ति कला संस्था के कलाकारों ने गुरु राधिका पाखी के निर्देशन में कथक की प्रस्तुति दी। मंच पर सबसे पहले ईश्वरी पताड़े ने गणेश वंदना की, जिसके बाद उद्भव ठक्कर ने कृष्ण वंदना पेश की।

इसके बाद ईश्वरी पताड़े और उद्भव ठक्कर ने युगल रूप में तराना प्रस्तुत कर कथक की गति और पद-संचालन का प्रदर्शन किया। अंत में संस्था की निदेशक राधिका पाखी ने एकल प्रस्तुति देकर भाव और ताल का समन्वय प्रस्तुत किया। वर्ष 2019 में स्थापित यह संस्था शास्त्रीय कला के प्रशिक्षण और संवर्धन से जुड़ी हुई है।










