रायगढ़। तमनार ब्लॉक के लिबरा सीएचपी चौक पर कोयला खदान विरोधी आंदोलन के दौरान ग्रामीणों पर हुए कथित लाठीचार्ज और दर्ज मुकदमों के मामले में न्यायिक जांच की मांग की गई है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं, अधिवक्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने राज्यपाल के नाम रायगढ़ कलेक्टर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने और गिरफ्तार ग्रामीणों पर दर्ज आपराधिक प्रकरण वापस लेने का अनुरोध किया गया है।

जनसुनवाई के विरोध से शुरू हुआ था 14 गांवों का धरना
ज्ञापन के अनुसार, तमनार ब्लॉक पूर्णतः कोयला अधिसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आता है। दिसंबर 2025 में प्रशासन द्वारा आयोजित जनसुनवाई का पर्यावरणविदों और स्थानीय ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया था। इसके बाद परियोजना से प्रभावित 14 गांवों के लोगों ने लिबरा स्थित सी.एच.पी. चौक पर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन शुरू किया, जिससे क्षेत्र में कोयला खनन और परिवहन का कार्य प्रभावित हो रहा था।
सड़क हादसे के बाद बढ़ा विवाद और पुलिस कार्रवाई
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि औद्योगिक दबाव के चलते आंदोलन को बाधित करने का प्रयास हुआ। आरोप के अनुसार, 27 दिसंबर 2025 को आंदोलन स्थल वाले मार्ग से वाहनों की आवाजाही अचानक शुरू करा दी गई। इसी दौरान एक वाहन की चपेट में आने से एक बुजुर्ग की मौके पर ही मौत हो गई।
हादसे के बाद जब ग्रामीणों ने विरोध जताया, तो आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने बल प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज किया। घटना के बाद पुलिस ने आंदोलन में शामिल 14 ग्रामीणों के खिलाफ गंभीर आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया। ज्ञापनकर्ताओं का आरोप है कि निर्दोष ग्रामीणों को दुर्भावनापूर्ण तरीके से मामलों में फंसाया गया है, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।
अधिवक्ता संघ, राजनीतिक सामाजिक सगठनों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग

इस ज्ञापन पर लैलूंगा के पूर्व विधायक हृदय राम राठिया, धरमजयगढ़ अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष कैलाश कुमार गुप्ता, जन चेतना, रायगढ़ बचाओ समिति और लारा संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों समेत कई नागरिकों ने हस्ताक्षर किए हैं। प्रतिनिधियों का कहना है कि विधिक प्रक्रियाओं का कथित उल्लंघन कर आदिवासियों और ग्रामीणों पर की गई कार्रवाई की जब तक निष्पक्ष न्यायिक जांच नहीं होगी, तब तक क्षेत्र में सामान्य स्थिति और न्याय की बहाली संभव नहीं है।









