रायगढ़: जिले की गारे पेलमा सेक्टर-2 कोयला खदान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि बिना जनता की राय जाने, बंद कमरों में पर्यावरण मंजूरी (EC) देने का शॉर्टकट अब नहीं चलेगा। इस प्रोजेक्ट के लिए अब गांव वालों के बीच जाकर नए सिरे से जनसुनवाई (Public Hearing) करनी ही होगी।
हालांकि, इस सख्त आदेश के बीच खदान मालिक ‘महाजेनको’ और इसे चलाने वाले ‘अदानी ग्रुप’ (MDO) को एक बड़ी राहत भी मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने खदान में चल रहे मौजूदा माइनिंग के काम पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत का कहना है कि जब तक नई जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, खदान से कोयला निकालने का काम पहले की तरह बदस्तूर जारी रहेगा।
आम आदमी की भाषा में समझें तो, पर्यावरण मंत्रालय की कमेटी ने बिना गांव वालों को बैठाए, पुराने कागजों और वीडियो के आधार पर ही खदान को हरी झंडी दे दी थी। NGT ने भी इसे सही मान लिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस तरीके को गलत ठहराते हुए कहा कि पुरानी फाइलों को पलटना, जनता के बीच होने वाली नई जनसुनवाई का विकल्प बिल्कुल नहीं हो सकता।
अब यह पूरा मामला वापस उसी NGT के पास पहुंच गया है। कल यानी 3 अगस्त से ट्रिब्यूनल में इस मामले की दोबारा सुनवाई शुरू हो रही है। NGT को ही अब गांव में होने वाली इस नई जनसुनवाई की पूरी निगरानी करनी है। कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट ने आम जनता को अपनी बात रखने का एक और बड़ा मौका दिया है, लेकिन कंपनियों का काम भी बाधित नहीं किया है।









