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डीजल भाड़ा बचाना या सरकारी पैसा हड़पना? : रायगढ़ में राइस मिलरों का ‘महाघोटाला’ बेनकाब!

सारंगढ़ का चालान, बैद्यनाथ फूड्स से लोडिंग… ट्रक यूनियन ने पकड़ा 580 बोरी चावल का खेल।

रायगढ़। कस्टम मिलिंग के नाम पर सरकारी खजाने में सेंध लगाने वाले राइस मिलरों और भ्रष्ट अफसरों का एक बड़ा नेक्सस रायगढ़ में उजागर हुआ है। डीजल और ट्रांसपोर्ट भाड़ा बचाने के लालच में कागजों पर 40 किलोमीटर गाड़ी चलाने का फर्जीवाड़ा किया जा रहा था। लेकिन मिलरों और ट्रांसपोर्टरों के इस ‘स्मार्ट’ खेल पर तब पानी फिर गया, जब ट्रक यूनियन रायगढ़ ने मुस्तैदी दिखाते हुए सरकारी चावल से लदे एक ट्रक को रंगे हाथों पकड़ लिया। इस खुलासे के बाद से एफसीआई (FCI) और मार्कफेड के गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।

40 किलोमीटर का ‘कागजी’ सफर और लाखों का चूना

इस पूरे घोटाले की पटकथा ट्रांसपोर्ट भाड़े (राजस्व) को डकारने के लिए लिखी गई थी। जब्त किए गए ट्रक के चालान (Truck Challan) के मुताबिक, चावल सारंगढ़ जिले के सरिया स्थित ‘भीमेश्वरी राइस मिल’ (M/s BHEEMESHWARI INDUSTRIES) से लोड होकर रायगढ़ के एफसीआई गोदाम (लोहारसिंग) में जमा होना था। चालान में बाकायदा गोदाम की दूरी 40 किलोमीटर दर्ज की गई है, जिसका भारी-भरकम ट्रांसपोर्ट भाड़ा सरकार द्वारा दिया जाता है। लेकिन शातिर मिलरों ने भाड़ा हड़पने के लिए सरिया से चावल मंगाया ही नहीं! आरोप है कि स्थानीय राइस मिलर और ट्रांसपोर्टर की मिलीभगत से यह चावल रायगढ़ स्थित ‘बैद्यनाथ फूड्स’ से ही फर्जी तरीके से लोड कर सीधे एफसीआई गोदाम भेजा जा रहा था।

यूनियन की मुस्तैदी से बेनकाब हुआ सिंडिकेट

शुक्रवार को ट्रक यूनियन रायगढ़ के पदाधिकारियों को इस हेराफेरी की पुख्ता भनक लग गई। उन्होंने बिना समय गंवाए घेराबंदी कर ट्रक (CG 13 AL 9548) को धर दबोचा। जब गाड़ी की तलाशी और कागजातों का मिलान किया गया, तो पूरी पोल खुल गई। ट्रक में 2025-26 फसल वर्ष का 580 बोरी (करीब 29 टन) फोर्टिफाइड (RRC) चावल लदा हुआ था। माल सरिया का होना था, लेकिन लोड रायगढ़ से हुआ था! प्रथम दृष्टया यह सीधे तौर पर कस्टम मिलिंग के चावल की भारी अफरा-तफरी और बिना गाड़ी चलाए फर्जी चालान के दम पर सरकारी पैसा हड़पने का मामला है।

डीओ-टीओ का ‘क्रॉस गेम’ और लीपापोती की तैयारी

कस्टम मिलिंग के बिजनेस में डीओ (DO) और टीओ (TO) क्रॉस करके डीजल भाड़ा बचाना एक पुराना खेल है, जो बिना विभागीय अफसरों की सांठगांठ के संभव ही नहीं है। जैसे ही ट्रक यूनियन ने इस धांधली का पर्दाफाश किया, राइस मिल एसोसिएशन से लेकर मार्कफेड और एफसीआई के कर्मचारियों के बीच पसीने छूट गए। सूत्रों की मानें तो अब इस पूरे मामले को रफा-दफा करने और लीपापोती की पुरजोर कोशिशें शुरू हो गई हैं।

अब बड़ा सवाल यह है कि कस्टम मिलिंग के नाम पर चल रहे इस ‘खेल’ में और कितने सफेदपोश शामिल हैं? ट्रक यूनियन की इस कार्रवाई ने राइस मिलरों और ट्रांसपोर्टरों के भ्रष्ट गठजोड़ की पोल तो खोल दी है, लेकिन क्या स्थानीय प्रशासन इन पुख्ता सबूतों के आधार पर इस ‘सिंडिकेट’ की गहराई से जांच कर एफआईआर (FIR) दर्ज करने की हिम्मत जुटा पाएगा?

नीचे वीडियो में देखिए ड्राइवर का बयान

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