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रायगढ़ का ‘राखड़ सिंडिकेट’: पहले जिंदल की जमीन, अब हाईवे पर डंपिंग! NTPC के अफसर आंख बंद कर पी रहे थे दूध, इस बार कीचड़ ने बिगाड़ा खेल..

रायगढ़। देश की महारत्न कंपनी एनटीपीसी लारा (NTPC Lara) अपने राखड़ सिंडिकेट को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहती है। एनटीपीसी के अफसर, ट्रांसपोर्टर और सत्ता के आशीर्वाद से बना यह ‘अवैध गठबंधन’ उस बिल्ली की तरह है, जो आंख बंद करके दूध पीती है और सोचती है कि उसे कोई नहीं देख रहा। फिर अचानक एक बर्तन खड़कता है और सब रंगे हाथों पकड़े जाते हैं! सिंडिकेट के साथ ठीक ऐसा ही दुबारा हुआ है।

बारिश ने बिगाड़ा खेल

ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार नेशनल हाईवे के किनारे अमलीभौना में बेखौफ चल रही राखड़ डंपिंग का भंडाफोड़ तब हुआ, जब बारिश में राखड़ खाली करते समय तीन ट्रेलर कीचड़ में फंस गए और वाहनों का आधा हिस्सा हाईवे पर आ गया। इसी ‘बर्तन की खनक’ ने पर्यावरण विभाग को मौके पर पहुंचने के लिए मजबूर कर दिया और सिस्टम में सेंधमारी का एक बड़ा सच सामने आ गया।

और क्या सबूत चाहिए..

मौके पर जब जांच शुरू हुई, तो पता चला कि यह पूरा राखड़ सीधे एनटीपीसी लारा के डैम से बिना किसी रोक-टोक के लाया जा रहा था। पकड़े गए तीनों ट्रेलर ट्रांसपोर्टर अंकुर अग्रवाल के नाम पर थे, जो 6 ट्रिप लगाकर कुल 235.84 टन राखड़ डंप कर चुके थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शासन के सख्त निर्देशों के बावजूद, इन वाहनों में न तो जीपीएस (GPS) लगा था और न ही ‘आईडब्ल्यूएमएमएस’ (IWMMS) पोर्टल पर इनकी कोई एंट्री थी। बिना पोर्टल एंट्री और जीपीएस के, इतनी भारी मात्रा में राखड़ एनटीपीसी के कड़ी सुरक्षा वाले डैम से बाहर कैसे आ गया? यह सीधे तौर पर अधिकारियों और ट्रांसपोर्टरों की मिलीभगत की गवाही देता है।

कलमी कांड

हैरानी की बात यह है कि रायगढ़ में यह राखड़ सिंडिकेट पहली बार उजागर नहीं हुआ है। ठीक एक साल पहले, 17 जुलाई 2025 को भी इसी सिंडिकेट ने अपनी हदें पार करते हुए ‘जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड’ (JSPL) के अधिकार क्षेत्र वाले ग्राम कलमी में अवैध रूप से राखड़ डंप कर दिया था। तब कागजों में वह राखड़ रायपुर और बलौदाबाजार भेजा जाना था, लेकिन उसे रायगढ़ में ही डंप कर दिया गया। जब जिंदल प्रबंधन ने इसकी शिकायत की, तब जाकर प्रशासन जागा था और पर्यावरण मंडल ने एनटीपीसी पर 4 लाख 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। उस वक्त कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने सभी थर्मल पावर प्लांटों की बैठक लेकर कड़ी चेतावनी भी दी थी।

हर बार वही पैतरा और सब कुछ क्लीन

लेकिन यह सिंडिकेट इतना बेलगाम है कि कलेक्टर की चेतावनियों का इस पर कोई असर नहीं होता। अपनी गर्दन फंसती देख, हर बार की तरह इस बार भी एनटीपीसी ने खानापूर्ति के लिए जुर्माना और ‘ब्लैक लिस्टिंग’ का पुराना खेल खेला है। पर्यावरण विभाग ने 3 लाख 53 हजार 760 रुपये का जुर्माना लगाया है और एनटीपीसी ने खुद को बचाने के लिए ट्रांसपोर्टर को ब्लैक लिस्ट कर दिया है।

2025 में भी यही हुआ था, जब 6 वाहनों और 3 एजेंसियों पर कार्रवाई का दिखावा किया गया था। जनता अब समझ चुकी है कि यह सिर्फ छलावा है; इस सिंडिकेट में सिर्फ नाम बदलते हैं, अवैध डंपिंग का काम बदस्तूर जारी रहता है। असली सवाल यह है कि आईडब्ल्यूएमएमएस पोर्टल को बायपास कराकर शहर को जहर परोसने वाले एनटीपीसी के असली ‘सफेदपोश’ चेहरों पर कार्रवाई का डंडा कब चलेगा? और सबसे मजे की बात यह है कि यह सब कुछ छत्तीसगढ़ के पर्यावरण मंत्री और रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी के गृह जिले में धड़ल्ले से हो रहा है! इसके पीछे दो ही वजह हो सकते हैं.. या तो परवाह नहीं है या आशीर्वाद है..?

-आशीष शर्मा, RIG24

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