रायगढ़, 19 सितम्बर 2026। चक्रधर समारोह की सांस्कृतिक संध्या में रविवार को एक नन्ही सी कलाकार ने अपने पैरों की थाप और आंखों की चमक से पूरे सभागार का मन मोह लिया। महज दस साल की कु. श्रीनिका ने कथक की जो प्रस्तुति दी, उसे देखकर वहां मौजूद हर दर्शक ठिठक गया। इतनी छोटी उम्र में इतनी परिपक्व प्रस्तुति देना वाकई किसी करिश्मे से कम नहीं था।

श्रीनिका बचपन से ही कथक सीख रही हैं और रोज के अभ्यास तथा लगन ने उन्हें इस शास्त्रीय नृत्य में गहरी पकड़ दिला दी है। मंच पर जब उन्होंने भाव, लय और ताल को साथ लेकर चलना शुरू किया तो दर्शकों की तालियां रुकने का नाम नहीं ले रही थीं। उनके चेहरे पर दिखने वाला आत्मविश्वास और हरेक मुद्रा में झलकती बारीकी यही बता रही थी कि यह बच्ची अपनी कला के प्रति कितनी गंभीर है।

यह पहला मौका नहीं है जब श्रीनिका ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया हो। इससे पहले भी वे मधुगुंजन, केरल समाजम् प्रतियोगिता, गीतांश उत्सव, कौशिकी, कथक दिवस, प्रणव्यम और अमृत ध्वनि जैसे कई मंचों पर अपनी कला पेश कर चुकी हैं और हर जगह से खूब वाहवाही बटोरी है। कई प्रतियोगिताओं में उन्होंने प्रथम पुरस्कार भी जीता है। रायपुर के कलावंत आयोजन में मिला ‘कलावंत सम्मान’ उनकी अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है।

इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी सफलता पाना बताता है कि श्रीनिका का भविष्य कथक की दुनिया में बेहद उज्जवल है और आने वाले वर्षों में वे इस कला को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी, इसमें कोई शक नहीं।










