रायगढ़/सारंगढ़। रायगढ़ के बड़े भंडार स्थित अडानी पावर प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश (राख) सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के लिए एक बड़ा पर्यावरणीय संकट बन चुकी है। छोटे घोटला और भोथली गांव के पास नियमों की अनदेखी कर बड़े पैमाने पर राख डंप की जा रही है। यह डंपिंग जीवनदायिनी महानदी के बेहद करीब स्थित एक बंद पड़ी खदान में हो रही है। इससे न केवल नदी का प्राकृतिक स्वरूप खतरे में है, बल्कि कृषि और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। लगातार शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक उदासीनता के कारण ग्रामीणों में गहरा असंतोष है।

जल प्रदूषण अधिनियम का उल्लंघन और दूषित होता जल
जल प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1974 (धारा 24) के अनुसार, किसी भी नदी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में राख पाटना पूरी तरह गैर-कानूनी है। लेकिन स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि यहां महानदी से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित एक गहरी खदान में राख उड़ेली जा रही है। CPCB के नियमों को धता बताते हुए, बिना ‘जियो-लाइनर’ बिछाए पानी भरे खदान में डंपिंग हो रही है। हाल ही में नदी का जलस्तर बढ़ने पर बाढ़ का पानी सीधे इस खदान में प्रवेश कर गया। इससे भूजल स्रोत दूषित हो रहे हैं।

किसानों की फसलें बर्बादी की कगार पर
किसानों ने बातचीत में बताया कि बाढ़ के पानी के साथ बहकर आई इस फ्लाई ऐश ने कृषि को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। हजारों टन राख अब भोथली और छोटे घोटला के खेतों में पहुंच चुकी है। किसानों की लहलहाती धान की फसल पर जहरीली राख की मोटी परत जम गई है। फसल में दाना भरने के इस अहम समय में राख चिपकने से पौधे तेजी से सूख रहे हैं। खाद-बीज के लिए कर्ज लेने वाले किसानों के सामने अब आजीविका का एक गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

मोटर वाहन अधिनियम का मखौल: 12 टन की सड़क पर 48 टन का भार
सड़क के बुनियादी ढांचे पर हो रहा प्रहार इस मामले का सबसे खुला और दृश्यमान अपराध है। राख की ढुलाई हरदी से सारा बैराज तक बनी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के मार्ग से हो रही है। इस सड़क की अधिकतम भार क्षमता केवल 12 टन निर्धारित है। मोटर वाहन अधिनियम 1988 (धारा 113) का खुला मखौल उड़ाते हुए, यहां 48 टन वजनी ओवरलोड हाईवा बेखौफ चलाए जा रहे हैं। करोड़ों की लागत से बनी यह सड़क अब टूटने लगी है, लेकिन RTO मौन है।

EIA नियमों की अनदेखी और सवालों के घेरे में प्रशासन
इस पूरे मामले में स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली गंभीर सवालों के घेरे में है। EIA अधिसूचना 2006 के तहत डंपिंग साइट पर NOC विवरण और क्षमता बताने वाला अनिवार्य सरकारी डिस्प्ले बोर्ड मौके से गायब है। वहां केवल एक सामान्य फ्लेक्स पर कंपनी का नाम और जमीन का खसरा नंबर लिखकर वैधानिक जानकारी छिपाई गई है। ग्रामीणों के विरोध के बाद खनिज विभाग ने दो ट्रकों को जब्त जरूर किया था। लेकिन बिना किसी ठोस दंडात्मक कार्रवाई के उन्हें अगले ही दिन छोड़ दिया गया।

NGT कोर्ट जाने की तैयारी में ग्रामीण
ऐसी प्रशासनिक अनदेखी भविष्य में किसी बड़े जन-आंदोलन को जन्म दे सकती है। इस गंभीर मामले को लेकर स्थानीय विधायक ने सारंगढ़ कलेक्टर को पत्र भी लिखा है। जिला प्रशासन को तुरंत संज्ञान लेकर साइट की वैज्ञानिक जांच करानी चाहिए और पीड़ित किसानों को उचित मुआवजा दिलाना चाहिए। ओवरलोड वाहनों पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगनी चाहिए। यदि समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण इन सभी दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की चौखट पर जाने की तैयारी कर रहे हैं।








