छोड़कर सामग्री पर जाएँ

महिला आरक्षक के साथ बदसलूकी के आरोपियों की जमानत ख़ारिज: पीड़िता की ओर मिश्रा चेंबर के अशोक कुमार, आशीष कुमार मिश्रा ने जमानत का किया था पुरजोर विरोध

रायगढ़। रायगढ़ जिले के तमनार में आंदोलन की आड़ में ड्यूटी में तैनात महिला आरक्षक के साथ की गई मारपीट और कपड़े फाड़ने जैसी शर्मनाक और अमानवीय कृत्य को  न्यायालय  ने गंभीरता से लेते हुए आज मुख्य आरोपी चित्रसेन साव की जमानत याचिका खारिज़ कर दी। आज विशेष न्यायाधीश (अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण) की अदालत में आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। जिसमें पीड़िता की तरफ से रायगढ़ के मिश्रा चेंबर के सीनियर एडवोकेट अशोक कुमार, आशीष कुमार मिश्रा के द्वारा घोर आपत्ति दर्ज कराई। माननीय विशेष न्यायाधीश शोभना कोस्टा द्वारा उनकी आपत्ति को गंभीरता से सुनते हुए आज आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।

क्या है मामला

घटना के संबंध में पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार बीते 27 दिसंबर को तमनार में हुई हिंसा के दौरान  मुख्य आरोपी चित्रसेन साव एवं कीर्ति उर्फ किशन श्रीवास द्वारा अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर ड्यूटी पर तैनात अन्य पुरुष पुलिसकर्मियों को छोड़कर एक महिला आदिवासी आरक्षक को दौड़ाकर खेत में ले जाया गया। जहां उसके साथ मारपीट की गई। उसे निर्वस्त्र किया गया। इसका वीडियो बनाया गया और साथ उसे जान से मारने की भी कोशिश की गई।

इस पूरे मामले में तमनार थाने में महिला आरक्षक की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 296, 351(2), 115(2), 109(1),221, 132, 74, 76, 77, 309 (4), 309(6), 3(5), 310(2), 121(1), 351(3), और आइटी एक्ट 66 E, 67A के तहत अपराध दर्ज किया गया था। इस मामले में पुलिस में मुख्य रुप समेत 6 लोगों की गिरफ्तारी की थी।

मिश्रा चैंबर की दलीलें

सीनियर एडवोकेट अशोक कुमार मिश्रा, आशीष कुमार मिश्रा

आज माननीय विशेष न्यायाधीश शोभना कोस्टा के न्यायालय में आरोपी की जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान पीड़िता की ओर से मिश्रा चेंबर के अशोक कुमार, आशीष कुमार मिश्रा के द्वारा लिखित और मौखिक आपत्ति दर्ज कराई गई। इस दौरान मिश्रा चेंबर के अधिवक्ता विजय शर्मा द्वारा माननीय न्यायालय के समक्ष दलील पेश करते हुए बताया कि आरोपी गण द्वारा भीड़ में पुरुष पुलिस कर्मियों को छोड़कर विशेष तौर पर पीड़िता को टारगेट किया गया। आरोपी गण यह जानते कि पीड़िता पुलिसकर्मी है, उसके साथ दुस्साहस पूर्वक मारपीट करते हुए तथा पीड़िता द्वारा लगातार रो रो कर मना करने के पश्चात  भी आरोपीगण द्वारा अमानवीय तरीके एक महिला को निर्वस्त्र कर उसका वीडियो बनाया गया तथा क्षेत्र में अपना प्रभाव जमाने के लिए वीडियो को वायरल भी कर दिया गया, इस प्रकार आरोपीगण द्वारा किया गया कृत्य गंभीर प्रकृति का अमानवीय कृत्य है। इस तरह के अपराधों में जमानत दिए जाने पर समाज में नकारात्मक संदेश प्रसारित होगा। उक्त मामले में शासन की ओर से भी आरोपीगण के जमानत आवेदन का पुरजोर विरोध किया गया।

न्यायालय का आदेश

माननीय विशेष न्यायधीश द्वारा सभी पक्षों की दलों को गंभीरता पूर्वक सुनने एवं अभिलेख का बारीकी से अवलोकन करने के उपरांत  आरोपी गण द्वारा एक महिला पुलिसकर्मी के साथ किए गए कृत्य को अत्यंत गंभीर प्रकृति का मानते हुए एवं प्रकरण के अन्य परिस्थितियों का आकलन करने के पश्चात उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया।

अपराधियों के मन में होगा कानून के प्रति भय

आरोपी गण की जमानत खारिज होने के संबंध में न्यायालय के आदेश पर शुक्रिया व्यक्त करते हुए मिश्रा चेंबर के सीनियर अधिवक्ता अशोक कुमार मिश्रा, आशीष कुमार मिश्रा द्वारा कहा गया कि इस आदेश से समाज में कानून व्यवस्था एवं न्यायालय के प्रति विश्वास पूर्ण सकरात्मक संदेश गया है एवं खुद को कानून से ऊपर  मानकर बेहिचक अपराध करने वाले अपराधियों के मन में अपराध के प्रति अब निश्चित रूप से भय उत्पन्न होगा।

ख़बर शेयर करें: