रायगढ़। जिले के धरमजयगढ़ में आदिवासी भूमि की खरीद-बिक्री और उसके नामांतरण में नियमों की अनदेखी का मामला सामने आने के बाद कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं। इस प्रकरण में जिस नामांतरण आवेदन को वर्ष 2018 में तत्कालीन नजूल अधिकारी ने खारिज कर दिया था, उसे ही वर्ष 2023 में पदस्थ नए अधिकारी ने मंजूरी दे दी। दो अधिकारियों के परस्पर विरोधी आदेश सामने आने के बाद राजस्व महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
बिना अनुमति 6.5 लाख में हुई थी रजिस्ट्री
यह मामला धरमजयगढ़ नजूल टाउन के प्लॉट नंबर 845/8 से संबंधित है। 2871 वर्गफुट की यह जमीन उरांव जाति के अभिषेक कुजूर के नाम पर दर्ज थी। शाहपुर निवासी कुमुद मंडल और कौशिक मंडल ने 23 जून 2017 को साढ़े छह लाख रुपये में इस भूमि का क्रय किया था। नियमों के मुताबिक, आदिवासी क्षेत्र में गैर-आदिवासी द्वारा आदिवासी की जमीन खरीदने से पहले कलेक्टर से अनुमति लेना अनिवार्य होता है, लेकिन इस मामले में कोई अनुमति नहीं ली गई थी। रजिस्ट्री के बाद खरीदारों ने नजूल अदालत में नामांतरण का आवेदन दिया था।
2018 में खारिज आवेदन को 2023 में दी गई मंजूरी
तत्कालीन नजूल अधिकारी ने इस सौदे को छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 165-6 (क) का उल्लंघन पाया था। इसके बाद 20 अगस्त 2018 को नामांतरण का आवेदन पूरी तरह खारिज कर दिया गया। नियमानुसार आवेदन खारिज होने के बाद खरीदार पक्ष को ऊपरी राजस्व अदालत में अपील करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा न करते हुए खरीदारों ने वर्ष 2023 में नए नजूल अधिकारी के सामने फिर से नया आवेदन प्रस्तुत किया। नए अधिकारी ने संबंधित धारा लागू न होने का तर्क देकर उसी नामांतरण को मंजूरी दे दी।
जांच रिपोर्ट के आधार पर तय होगी आगे की कार्रवाई
एक ही भूमि पर दो अलग-अलग अधिकारियों के विरोधाभासी फैसलों के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश जारी किए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि नियमों की अनदेखी किस स्तर पर की गई। उसी रिपोर्ट के आधार पर संबंधित पक्षों के खिलाफ आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।








