रायगढ़। जिले की कापू पुलिस ने ‘ऑपरेशन क्लीन हंट’ के तहत जमीन फर्जीवाड़े के बड़े मामले में फरार आरोपी सुखन राठिया को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर पण्डो जनजाति की जमीन को फर्जी दस्तावेजों और फर्जी पहचान के सहारे गैर-आदिवासी के नाम बेचने का आरोप है। पुलिस टीम ने घेराबंदी कर उसे कोरबा से पकड़ा और पूछताछ के बाद अदालत में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
फर्जी पहचान और 10 हजार रुपये में जमीन बेचने का खेल
यह मामला कापू थाना क्षेत्र के ग्राम डुमरनारा स्थित खसरा नंबर 409 की जमीन से जुड़ा हुआ है। सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि विशेष संरक्षित पण्डो जनजाति के सदस्यों के नाम पर दर्ज थी। साल 2023-24 के दौरान बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के इस जमीन को कागजों में ‘सुखन पिता बजरंग रावत’ के नाम पर चढ़ा दिया गया।
इसके बाद 21 फरवरी 2024 को फर्जी पहचान पत्र का इस्तेमाल करते हुए यह जमीन रायपुर निवासी संतोष देवी गुप्ता को बेच दी गई थी। पुलिस पूछताछ में आरोपी सुखन राठिया ने स्वीकार किया कि उसे इस पूरे फर्जीवाड़े में सिर्फ विक्रेता बनने के लिए 10 हजार रुपये दिए गए थे।
तमिलनाडु भागकर काटा समय, फिर कोरबा में छिपा
मामले में केस दर्ज होने के बाद सुखन राठिया पुलिस से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। वह गिरफ्तारी से बचने के लिए पहले तमिलनाडु भाग गया था। जब उसे लगा कि मामला शांत हो चुका है, तो वह वापस लौटकर कोरबा में आकर छिप गया। कापू पुलिस को सटीक लोकेशन मिलते ही टीम ने दबिश देकर उसे कोरबा से धर दबोचा।
पटवारी और गवाह पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार
कापू तहसीलदार उन्मेश पटेल की रिपोर्ट पर पुलिस ने धोखाधड़ी और कूट रचना की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान तत्कालीन हल्का पटवारी राकेश कुमार साय की भी संलिप्तता सामने आई थी, जिसने जमीन बिक्री के लिए चौहद्दी तैयार की थी।
पुलिस तत्कालीन पटवारी और गवाह अगस्तुस खलखो को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आदिवासी जमीनों की अवैध खरीद-बिक्री में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और जांच जारी है।







