छत्तीसगढ़ के जंगलों से एक दुर्लभ और बेहद दिलचस्प वन्यजीव की तस्वीर सामने आई है, जिसने लोगों और वन्यजीव प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। उदंती सीतानगर टाइगर रिजर्व के बम्हनी झोला ग्राम में एक दुर्लभ ‘उड़ने वाली गिलहरी’ (इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरेल) को कैमरे में कैद किया गया है। सोशल मीडिया पर इस जीव की तस्वीर वायरल होने के बाद लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि क्या सचमुच कोई गिलहरी हवा में उड़ सकती है और इसका जीवन चक्र कैसा होता है।
क्या है उड़ने वाली गिलहरी?
आमतौर पर पेड़ों की डालियों पर तेजी से दौड़ती छोटी गिलहरियां हम सभी देखते हैं, लेकिन यह जीव उनसे काफी अलग और बड़ा होता है। इसका वैज्ञानिक नाम ‘पैटॉरिस्टा फिलिपेंसिस’ (Petaurista philippensis) है और अंग्रेजी में इसे ‘इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरेल’ कहा जाता है। हिंदी में इसे विशाल उड़ने वाली गिलहरी या उड़न गिलहरी के नाम से जाना जाता है। यह भारत के घने जंगलों में पाई जाने वाली एक दुर्लभ प्रजाति है।
क्या यह वाकई पक्षियों की तरह उड़ती है?
नाम में ‘उड़ने वाली’ शब्द जुड़े होने के बावजूद यह जीव पक्षियों की तरह पंख फड़फड़ा कर उड़ान नहीं भरता। इसके शरीर की बनावट ऐसी होती है जो इसे हवा में तैरने यानी ‘ग्लाइड’ करने में सक्षम बनाती है।
इसके आगे और पीछे के पैरों के बीच चमड़े की एक पतली, लचीली झिल्ली होती है, जिसे विज्ञान की भाषा में ‘पटाजियम’ (Patagium) कहा जाता है। जब यह गिलहरी किसी ऊंचे पेड़ से छलांग लगाती है, तो अपने चारों पैरों को फैला लेती है। ऐसा करते ही यह झिल्ली एक पैराशूट की तरह खुल जाती है। इस झिल्ली की मदद से यह गुरुत्वाकर्षण को संभालते हुए एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक हवा में तैरते हुए लंबी दूरी तय कर लेती है।
कैसा होता है इसका स्वभाव और रहन-सहन?
उड़ने वाली गिलहरी पूरी तरह से एक निशाचर (Nocturnal) प्राणी है। इसका मतलब है कि यह दिन के उजाले में सक्रिय नहीं होती, बल्कि पेड़ों के कोटरों, खोखलों या घोंसलों में छिपी रहती है। जैसे ही शाम ढलती है या रात होती है, यह भोजन की तलाश में बाहर निकलती है। रात में सक्रिय रहने और ऊंचे पेड़ों पर रहने की वजह से ही इंसानों द्वारा इसे देखा जाना बहुत दुर्लभ माना जाता है।
तस्वीर कैसे आई सामने और क्यों हो रही है चर्चा?
उदंती सीतानगर टाइगर रिजर्व के बम्हनी झोला ग्राम क्षेत्र में तैनात वन रक्षक टी. के. देवांगन ने अपनी सतर्कता से इस दुर्लभ जीव को कैमरे में कैद किया। इसके बाद भाजपा छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक ने इस तस्वीर को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया। इसके बाद से यह अद्भुत तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
जंगल और पर्यावरण के लिए क्या हैं इसके मायने?
उदंती सीतानगर जैसे टाइगर रिजर्व में इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरेल की मौजूदगी सीधे तौर पर जंगल के स्वास्थ्य को दर्शाती है। यह जीव पुराने, विशाल और घने पेड़ों वाले जंगलों में ही जीवित रह सकता है। इस तरह के दुर्लभ वन्यजीव का मिलना यह प्रमाणित करता है कि क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) संतुलित और समृद्ध है। साथ ही, यह वन विभाग के मैदानी अमले और वन रक्षकों की सजगता को भी रेखांकित करता है।









