रायगढ़: जिले की गारे पेलमा सेक्टर-2 कोयला खदान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि बिना जनता की राय जाने, बंद कमरों में पर्यावरण मंजूरी (EC) देने का शॉर्टकट अब नहीं चलेगा। इस प्रोजेक्ट के लिए अब गांव वालों के बीच जाकर नए सिरे से जनसुनवाई (Public Hearing) करनी ही होगी।
हालांकि, इस सख्त आदेश के बीच खदान मालिक ‘महाजेनको’ और इसे चलाने वाले ‘अदानी ग्रुप’ (MDO) को एक बड़ी राहत भी मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने खदान में चल रहे मौजूदा माइनिंग के काम पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत का कहना है कि जब तक नई जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, खदान से कोयला निकालने का काम पहले की तरह बदस्तूर जारी रहेगा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने 24 जुलाई को यह निर्णय दिया, जिसे बाद में अपलोड किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें बिना नई जन सुनवाई के दी गई पर्यावरण मंजूरी को स्वीकार कर लिया गया था। शीर्ष अदालत ने इस मामले को वापस NGT को भेजते हुए निर्देश दिया है कि वह 3 अगस्त से मामले की सुनवाई करे और जन सुनवाई प्रक्रिया की निगरानी करते हुए इसका शीघ्र अंतिम निपटारा करे।
‘नए सिरे से’ प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्यः सुप्रीम कोर्टमामले पर टिप्पणी करते हुए पीठ ने कहा कि NGT के पिछले आदेश में प्रयुक्त ‘नए सिरे से’ (afresh) शब्द का सीधा और स्पष्ट अर्थ यही था कि प्राधिकारियों के लिए नई जन सुनवाई आयोजित करना बाध्यकारी था। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, पुरानी वीडियोग्राफी या दस्तावेजों की समीक्षा करना नई जन सुनवाई का विकल्प नहीं हो सकता।
आम आदमी की भाषा में समझें तो, पर्यावरण मंत्रालय की कमेटी ने बिना गांव वालों को बैठाए, पुराने कागजों और वीडियो के आधार पर ही खदान को हरी झंडी दे दी थी। NGT ने भी इसे सही मान लिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस तरीके को गलत ठहराते हुए कहा कि पुरानी फाइलों को पलटना, जनता के बीच होने वाली नई जनसुनवाई का विकल्प बिल्कुल नहीं हो सकता।
अब यह पूरा मामला वापस उसी NGT के पास पहुंच गया है। कल यानी 3 अगस्त से ट्रिब्यूनल में इस मामले की दोबारा सुनवाई शुरू हो रही है। NGT को ही अब गांव में होने वाली इस नई जनसुनवाई की पूरी निगरानी करनी है। कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट ने आम जनता को अपनी बात रखने का एक और बड़ा मौका दिया है, लेकिन कंपनियों का काम भी बाधित नहीं किया है।









