रायगढ़। रायगढ़ जिले के खरसिया (परासकोल) में रमेश चौहान की पुलिस कस्टडी में हालत बिगड़ने और उसके मौत के बाद हुए भारी बवाल को प्रशासन ने ‘न्यायिक जांच’ के वादे के साथ शांत करा लिया है। प्रशासन ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच होगी और जब तक यह जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक खरसिया टीआई (TI) राजेश जांगड़े समेत तीन पुलिसकर्मियों को थाने से हटाकर ‘लाइन अटैच’ (रक्षित केंद्र संबद्ध) रखा जाएगा।
खबर के मुख्य बिंदु:
- कस्टोडियल डेथ के आरोपों के बीच प्रशासन ने मानी थी न्यायिक जांच की मांग
- जांच प्रभावित न हो, इसलिए खरसिया TI राजेश जांगड़े और 2 आरक्षकों को किया गया ‘लाइन अटैच’
- विधायक उमेश पटेल की मौजूदगी में प्रशासन और आक्रोशित ग्रामीणों के बीच बनी थी सहमति
- न्यायिक जांच प्रक्रिया में शामिल होने के लिए ग्रामीणों की तरफ से मांगे गए 5 लोगों के नाम
- पीड़ित की पत्नी को कलेक्टर दर नौकरी का वादा, अब सबको है पोस्टमार्टम और जांच रिपोर्ट का इंतजार
मौत के बाद हुआ था भारी बवाल
कस्टोडियल डेथ के विरोध में उग्र ग्रामीणों ने जब बोतल्दा (NH-49) में नेशनल हाईवे जाम कर दिया था, तब स्थिति गंभीर हो गई थी, क्योंकि इसके पहले तहसील कार्यालय में ग्रामीणों की प्रारंभिक प्रशासनिक वार्ता फेल हो गई थी। मौके पर पहुंचे विधायक उमेश पटेल की मध्यस्थता में प्रशासन, एसडीएम, एसडीओपी और ग्रामीणों के बीच लंबी बातचीत हुई।


ग्रामीणों की स्पष्ट मांग थी कि दोषी पुलिसकर्मियों को कस्टडी में लिया जाए और कठोर कार्यवाही हो। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से मामले की ‘न्यायिक जांच’ (Judicial/Magisterial Inquiry) के आदेश दे दिए थे।
निष्पक्ष जांच के लिए ‘लाइन अटैच’
प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि चूंकि पुलिस महकमे पर ही हत्या और टॉर्चर का गंभीर आरोप है, इसलिए निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित पुलिसकर्मियों का थाने से हटना कानूनी रूप से जरूरी है।
इसी प्रक्रिया के तहत SSP रायगढ़ ने आदेश जारी कर खरसिया थाना प्रभारी (TI) राजेश कुमार जांगड़े, चौकी जोबी के आरक्षक विशोप सिंह और थाना खरसिया के आरक्षक योगेश साहू को आगामी आदेश (जांच रिपोर्ट आने) तक ‘लाइन अटैच’ किया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि ये अधिकारी अपने पद का इस्तेमाल कर सबूतों या गवाहों को प्रभावित न कर सकें।

5 ग्रामीण रखेंगे जांच पर नजर
इस न्यायिक जांच को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन ने ग्रामीणों से 5 लोगों के नाम मांगे हैं, जो इस पूरी जांच प्रक्रिया के दौरान गांव और पीड़ित परिवार का पक्ष रखेंगे। इसके अलावा, प्रशासन ने पीड़ित की पत्नी को नियमानुसार नौकरी देने का भी वादा किया है।
इस समझौते के बाद ग्रामीणों का आक्रोश शांत हुआ है। हालांकि, रमेश चौहान के परिजनों और रायगढ़ की जनता को अब उस न्यायिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार है, जिसके बाद पीड़ितों को न्याय मिल सके।
खरसिया एसडीएम प्रवीण तिवारी ने बताया
इस पूरे मामले में खरसिया एटीएम प्रवीण तिवारी में बताया कि ग्रामीणों और पीड़ित पक्ष की मांग के आधार पर जांच की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। इसके लिए जुडिशल जांच कमेटी बनाई जाएगी। निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित पुलिसकर्मीयों पर लाइन अटैच किया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच कमेटी के रिपोर्ट के आधार पर आगे की न्यायसंगत कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। मृतक के परिवार की आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए जीवन यापन के लिए मृतक की पत्नी को योग्यता अनुसार नौकरी दी जाएगी।



