रायगढ़/सारंगढ़। रायगढ़ के बड़े भंडार स्थित अडानी पावर लिमिटेड का फ्लाई ऐश को सारंगढ़ के छोटे घोटला में डंप किया जा रहा है। महानदी में आई बाढ़ ने इस डंपिंग यार्ड को डुबाकर सरकारी फाइलों का पूरा सच नंगा कर दिया था। लेकिन एक पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी रायगढ़ पर्यावरण विभाग (CECB) की तरफ से कोई ऑफिशियल एक्शन नहीं लिया गया है।
एक्शन होगा भी कैसे? जब पर्दे के पीछे ‘सेटिंग’ का तगड़ा खेल चल रहा हो। अब इस मामले को दबाने के लिए साम-दाम-दंड-भेद, सारी नीतियां अपनाई जा रही हैं।
जो सच दिखाएगा, उसे कुचला जाएगा!
ग्राउंड जीरो पर जाकर जिसने भी इस ‘राख कांड’ की कवरेज की, अब उसे डराया जा रहा है। एक लोकल डिजिटल जर्नलिस्ट, जिसने अपने यूट्यूब चैनल पर सबसे पहले यह स्टोरी ब्रेक की थी, उसके खिलाफ जिला पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय में झूठी शिकायत दी गई है।उस पर एक प्रभावशाली मंत्री के नाम की धमकियां दी जा रही हैं। चारों तरफ से जबरदस्त ‘प्रेसर’ बनाया जा रहा है। कुछ अन्य मीडिया वालों से भी ऐसी ही घटनाओं की खबरें आ रही हैं।
क्या दो बार की विधायक भी झूठ बोल रही हैं?
इस पूरे प्रकरण में हमारी इन्वेस्टिगेशन के दौरान एक ऐसा खुलासा हुआ है, जो सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा है। सारंगढ़ की विधायक उत्तरी जांगड़े ने एक मीडिया इंटरव्यू में ऑन-कैमरा बताया कि वे खुद इस मामले की शिकायत सारंगढ़ कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू से 2 से 3 बार कर चुकी हैं।
विधायक ने साफ कहा कि बाढ़ के दौरान पानी फ्लाई ऐश यार्ड में घुसा। राख महानदी और किसानों के खेतों में मिल गई जिससे फसलें बर्बाद हो गईं। इसके अलावा राख ढोने वाले भारी-भरकम व्यावसायिक वाहनों के कारण गांव की प्रधानमंत्री सड़क (PMGSY Road) उखड़ रही है। विधायक ने डंपिंग रोकने का निवेदन किया था, लेकिन 15-20 दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।
जरा सोचिए! जिस सिस्टम में दो बार की चुनी हुई विधायक को अपनी ही जनता के लिए ‘गिड़गिड़ाना’ पड़े और प्रशासन कोई रिस्पॉन्स न दे, वहां एक आम आदमी की क्या बखत होगी?
कागजों में ‘नदी’ नहीं थी, तो पानी कैसे घुसा?
अब जरा पर्यावरण और राजस्व विभाग का ‘खेला’ देखिए। रायगढ़ क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी मानवेंद्र पांडे का जवाब है कि राजस्व विभाग की NOC में कहा गया था कि ‘300 मीटर तक कोई नदी या बाढ़ प्रभावित क्षेत्र नहीं है’। इसी कागज के आधार पर डंपिंग की परमिशन दे दी गई।
कायदे से परमिशन देने से पहले मौके का फिजिकल वेरिफिकेशन होना था, जो नहीं हुआ। जब बाढ़ का पानी खेतों तक पहुंच गया, तब पर्यावरण विभाग के अधिकारी ने उस साइट का विजिट किया। लेकिन 15 दिन बाद भी उस विजिट रिपोर्ट को आज तक पब्लिक क्यों नहीं किया गया?
सबसे बड़ा सवाल…
पर्यावरण विभाग और अडानी पावर की इस लंबी खामोशी ने अब एक सीधा सवाल खड़ा कर दिया है। तो क्या अब महानदी का पानी झूठ बोल रहा है? क्या ग्राउंड की तस्वीरें झूठ बोल रही हैं? क्या दो बार की विधायक उत्तरी जांगड़े झूठ बोल रही हैं?
या फिर सच सिर्फ वही है जो अडानी पावर का काम बनाने के लिए एक अधिकारी ने एयर-कंडीशंड कमरे में बैठकर NOC की फाइल में लिख दिया था?









