रायपुर। ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल बंटवारे के विवाद को सुलझाने के लिए केंद्र सरकार ने पहल की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए 1 अक्टूबर को नई दिल्ली में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक अहम बैठक बुलाई है। ओडिशा के महाधिवक्ता पीतांबर आचार्य ने मंगलवार को इस बैठक की जानकारी दी।
बैठक में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल होंगे। इसके अलावा दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और तकनीकी समितियों के सदस्य भी उपस्थित रहेंगे। इस बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल भी हिस्सा लेंगे।
आपसी बातचीत से समाधान की दिशा में बढ़े कदम
यह बैठक ऐसे समय में आयोजित हो रही है जब करीब दस दिन पहले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भुवनेश्वर यात्रा के दौरान ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से मुलाकात की थी। उस दौरान दोनों नेताओं ने बातचीत के जरिए विवाद को सुलझाने पर सहमति जताई थी। ओडिशा के मुख्यमंत्री माझी ने उम्मीद जताई थी कि दिवाली से पहले इस मामले का सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला जा सकता है।
इससे पहले 30 जुलाई को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी दोनों पक्षों ने सहमति व्यक्त की थी। वहीं, महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण ने भी आपसी समझौते के विचार का समर्थन किया है, जिसके आधार पर केंद्रीय जल आयोग कार्ययोजना तैयार कर रहा है।
विवाद की पृष्ठभूमि और न्यायाधिकरण का गठन
महानदी के जल बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच एक दशक से अधिक समय से विवाद चल रहा है। ओडिशा सरकार का आरोप रहा है कि छत्तीसगढ़ द्वारा ऊपरी हिस्से में औद्योगिक जरूरतों के लिए बनाए गए बैराजों के कारण नदी के निचले प्रवाह पर असर पड़ता है। ओडिशा का कहना है कि कम बारिश और सूखे के समय उसे पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है।
ओडिशा ने वर्ष 2016 में तत्कालीन जल संसाधन मंत्रालय के समक्ष छह बैराजों के निर्माण को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वर्ष 2018 में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया था।
दोनों राज्यों के लिए महानदी का महत्व
महानदी छत्तीसगढ़ की लगभग 78 प्रतिशत आबादी के बेसिन क्षेत्र से जुड़ी हुई है और इसे राज्य की जीवन रेखा माना जाता है। दूसरी ओर, ओडिशा के तटीय जिलों में खेती और पेयजल की आपूर्ति के लिए भी यह नदी बेहद महत्वपूर्ण है। 1 अक्टूबर को नई दिल्ली में होने वाली इस बैठक से दोनों राज्यों के बीच दशकों पुराने गतिरोध को खत्म करने के ठोस रास्ते खुलने की उम्मीद है।









