रायगढ़/सारंगढ़। लाइमस्टोन के ओपन माइंस खोलने वाली कंपनी ग्रीन सस्टेनेबल को लेकर पिछले 20- 25 दिनों से प्रभावित क्षेत्रों में काफी विरोध है। प्रभावित ग्रामीणों ने सारंगढ़ जिला कलेक्टर से भी करीब हफ्ते भर पहले इसकी पर्यावरण जनसुनवाई रद्द करने की मांग की थी। और आज सैकड़ो ग्रामीणों ने सारंगढ़ तहसील कार्यालय से कलेक्ट्रेट तक इसके विरोध में रैली निकाली। प्रभावित ग्रामीणों के साथ स्थानीय सरपंच जिला पंचायत और विधायक भी इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं लेकिन प्रशासन जनसुनवाई कराने की जिद्द पर अड़ा हुआ हैं।
लगातार विरोध, प्रशासन के खिलाफ लोगों में गुस्सा
ज्ञात हो की सारंगढ़ लात नाला किनारे बसे ग्राम लालघुरवा, जोगनीपाली, कपिस्दा, सरसरा, एवं धौराभांठा के 500 एकड़ से अधिक जमीन पर शासन द्वारा इस कंपनी को लाईमस्टोन ओपन खदान की अनुमती देने से क्षेत्र में आकोश व्याप्त है।
आज विधायक उत्तरी जांगड़े व जनपद पंचायत अध्यक्ष ममता राजीव सिंह के नेतृत्व में रैली निकाली व कलेक्ट्रेट में कलेक्टर से आगामी 24 सितंबर से होने वाली जनसुनवाई निरस्त करने की मांग कि और इस मामले को सुनने बाहर नहीं आने को पर ‘कलेक्टर हाय हाय..’ की नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट का घेराव कर दिया।
इसके पहले भी स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने इस जनसुनवाई को रद्द करने की मांग की है। 16 सितंबर को सैकड़ों ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपा, जिसमें खदान के कारण पर्यावरण, कृषि और गांवों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव का हवाला दिया गया था।
प्रशासन अड़ा और लोगों में जनसुनवाई में फर्जीवाड़े का शक
विरोधकर्ताओं में प्रभावितों के साथ सरपंच और जिला पंचायत के सदस्य और पदाधिकारी शामिल थे। पिछली बार कलेक्टर से मिलने पहुंचे लोगों का स्पष्ट कहना था कि यह प्रोजेक्ट उनके हरे-भरे खेतों को बर्बाद कर देगा। इस खदान से निकलने वाले धूल और गाड़ियों की वजह से उनके सेहत पर भी बहुत बुरा असर पड़ने वाला है। कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने इस पर प्रतिक्रिया दी कि वे अपना मौखिक को लिखित विरोध जनसुनवाई के दिन दे। वही जनसुनवाई को लेकर लोगों ने बताया कि उन्हें जानकारी है कि कंपनी के लोग जनसुनवाई के दिन गाड़ियों में भरकर बाहर के लोग लेकर आएंगे और जनसुनवाई के समर्थन में अपनी बात कहेंगे।
एक तरह से देखा जाए तो उनका कहना सही है क्योंकि ऐसे सब मामलों में कंपनियां अपने एंप्लॉय, और भाड़े के बाहरी और असामाजिक तत्वों को लाकर जनसुनवाई के समर्थन में अपनी बात कहलाते हैं। ऐसा पैंतरा इसके पहले भी ऐसा कई बार देखा जा चुका है।
कंपनी के पीछे छुपे राज गहरे, किसका हाथ..??
दरअसल ग्रीन संसस्टेबल कंपनी के डायरेक्टर में एक मुकेश डालमिया के द्वारा इस पर्यावरण स्वीकृति के लिए आवेदन दिया गया है। नलवा स्पेशल स्टील के डायरेक्टर मुकेश डालमिया और नलवा स्टील एंड पावर लिमिटेड के डायरेक्टर सरदार सिंह राठी, यह दोनों कंपनीया और उनके डायरेक्टर तब सुर्खियों में आए, जब कलेक्टर ऑफ स्टांप ने राजस्व की चोरी का एक मामला पकड़ा। जिसमें अपने ही परिसर की औद्योगिक भूमि को कृषि भूमि बताकर आपस में ही खरीदी बिक्री की गई थी। इन पर करीब 25 लाख रुपए अतिरिक्त भुगतान करने का आदेश जारी हुआ था। आपको बता दें कि मुकेश डालमिया भी नलवा स्टील एंड पावर लिमिटेड रायगढ़ का एक हिस्सा है और नलवा परिसर में ही नलवा स्पेशल स्टील के नाम से एक दूसरी नई कंपनी बनाई गई। जिसमें कंपनी के एम्पलाई मुकेश डालमिया को ही डायरेक्टर बनाया गया और यह वही मुकेश डालमिया है, जो अभी इस माइनिंग कंपनी के भी डायरेक्टर हैं। आपको बता दे किसके साथ ही नलवा स्टील एंड पावर पर जल संसाधन विभाग का करीब 51 लाख 90 हजार का राजस्व भी बाकी था, जिसके लिए जल संसाधन विभाग द्वारा नोटिस भी भेजा गया था।
जनसुनवाई में गड़बड़ी की आशंका
कंपनियों का यह रहस्यमई जाल, नलवा स्टील एंड पावर लिमिटेड, फिर नलवा स्पेशल स्टील और अब यह ग्रीन संसस्टेबल कंपनी इनके पीछे का कनेक्शन का राज गहरा है और राजस्व से जुड़े मामले को देखकर, उनके जनहित वादों पर शक की सुई घूमती है। वहीं 24 तारीख को पर्यावरण जनसुनवाई में ग्रीन संसस्टेबल कंपनी.. फिलहाल तो बड़ी मात्रा में अपने पक्ष में लोगों को खड़ा कर सकती है क्योंकि उसके पास पहले से ही अपने एम्पलाइज की लंबी चौड़ी फौज भी है.. पहुंच और पावर भी है.. लोगों में जनसुनवाई की पारदर्शिता को लेकर भारी शंका है। लेकिन इतने भारी विरोध के बाद भी पर्यावरण जनसुनवाई स्थगित क्यों नहीं की गई..?? भारी विरोध बाद भी.. ऐसी क्या मजबूरी है कि पांच गांवों को उजाड़ना जरूरी है…..? इतनी जरूरी है जनसुनवाई..??


