रायगढ़। शहर में 200 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुई अमृत मिशन योजना अब सफेद हाथी साबित हो रही है। योजना शुरू करते वक्त शहरवासियों को 24 घंटे साफ पानी देने का बड़ा भरोसा दिया गया था। लेकिन धरातल पर दावों की पोल खुल चुकी है। शहर के वार्ड क्रमांक 14 और 16 के लोग आज भी मूलभूत पेयजल सुविधा के लिए तरस रहे हैं।
इन वार्डों में अमृत मिशन के तहत रोजाना सिर्फ 15 से 20 मिनट ही पानी की सप्लाई हो रही है। इतने कम समय में एक सामान्य परिवार की दैनिक जरूरतें भी पूरी नहीं हो पातीं। योजना लागू होते ही नगर निगम ने पुराने बोरिंग कनेक्शन काट दिए थे। अब पर्याप्त पानी न मिलने से परेशान लोग दोबारा अवैध रूप से बोर कनेक्शन जोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।
समस्या से जूझ रहे वार्डवासियों ने नगर निगम से लेकर ‘सुशासन तिहार’ के शिविर में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के करीब डेढ़ महीने बाद निगम की टीम जांच के लिए मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह जांच सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह गई। मौके पर समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
दूसरी ओर, नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी अपनी कमियां छुपाने के लिए बिजली की समस्या का बहाना बना रहे हैं। जल विभाग के सब इंजीनियर प्रभारी सूरज देवांगन के मुताबिक, सुबह 1 घंटे पानी दिया जा रहा है। शाम को बिजली आपूर्ति बाधित होने से ओवरहेड टैंक से सप्लाई प्रभावित होती है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इस तकनीकी खामी का स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं निकाला गया?
मामले में वार्डवासी लक्ष्मीकांत दुबे का कहना है कि डेढ़ महीने बाद आई निगम टीम सिर्फ खानापूर्ति करके चली गई। वहीं रहवासी अभिषेक पांडे और सुभाष मजूमदार ने बताया कि 24 घंटे पानी मिलने का दावा पूरी तरह झूठा साबित हुआ है। बिजली गुल होते ही मोहल्ले में पानी के लिए हाहाकार मच जाता है। 200 करोड़ खर्च होने के बाद भी जनता का रोज पानी के लिए संघर्ष करना प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।









