रायगढ़: रायगढ़ की जीवनदायिनी कही जाने वाली केलो नदी इन दिनों एक बार फिर सियासी और सामाजिक चर्चा के केंद्र में है। इस बार चर्चा का कारण कोई सरकारी फाइल या योजना का ऐलान नहीं, बल्कि सूबे के वित्त मंत्री ओपी चौधरी का सीधे नदी में छलांग लगाना है।

दरअसल, मौका था केलो नदी के खर्रा घाट पर मरीन ड्राइव और ऑक्सीजोन के बहुप्रतीक्षित भूमि पूजन का। लेकिन इस आयोजन के बीच अचानक मंत्री ओपी चौधरी केलो नदी की सफाई के लिए खुद पानी में उतर गए। उनके साथ महापौर जीवर्धन चौहान और पार्षद आनंद भगत भी कदम से कदम मिलाते नजर आए। मंत्री जी ने खुद नदी में बह रहे गणेश प्रतिमाओं के अवशेष और कचरे को बाहर निकाला और आसपास के इलाके में साफ-सफाई कर एक संदेश देने की कोशिश की। सत्ता पक्ष इसे नदी संरक्षण के प्रति मंत्री का समर्पण बता रहा है, लेकिन दूसरी तरफ विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे ‘पॉलिटिकल स्टंट’ करार देते हुए तीखा हमला बोला है।

‘उंगली कटाकर शहीद कहलाने का अभियान’
इस घटनाक्रम के बाद रायगढ़ के वरिष्ठ कांग्रेस नेता अनिल चीकू ने सोशल मीडिया (फेसबुक) पर एक वीडियो बयान जारी कर सत्ता पक्ष पर करारा तंज कसा। उन्होंने कहा कि नगरीय अपशिष्टों (कचरे) की सफाई के लिए तो सरकारी खर्चे पर एक पूरा भारी-भरकम अमला पहले से ही नियुक्त है, फिर मंत्री जी को खुद नदी में क्यों उतरना पड़ा? अनिल चीकू ने जिले के सबसे बड़े और असल मुद्दे की ओर ध्यान खींचते हुए कहा,
“सबसे ज्यादा प्रदूषित करने वाले औद्योगिक अपशिष्टों (इंडस्ट्रियल वेस्ट) की सफाई करते तो कोई बात होती।”
उन्होंने मंत्री के इस कदम को महज दिखावा करार देते हुए कहा कि
“उंगली कटाकर शहीद कहलाने का अभियान चल रहा है !”
“उद्योगों की तरफ देखा तो विधायकी भी खत्म समझो”
कांग्रेस के इस हमले को और धार देते हुए वरिष्ठ कांग्रेसी नेता देवदत्त चौरसिया (गुड्डा) ने भी इसी पोस्ट पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उन्होंने रायगढ़ में उद्योगों के रसूख और सत्ता की मजबूरी की ओर इशारा करते हुए लिखा…
“उद्योगों की तरफ नजर भी डाली तो मंत्रालय तो क्या, विधायकी भी खत्म समझो…।”
उन्होंने सरकार के दोहरे रवैये पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि
सरकार एक तरफ ‘एक पेड़ माँ के नाम’ और ‘ऑक्सीजोन’ की बड़े जोर-शोर से ब्रांडिंग करती है, लेकिन जब जिले में उद्योगों के लिए लाखों पेड़ काट दिए जाते हैं, तब किसी के मुंह से एक शब्द भी नहीं निकलता।

क्या विपक्ष भी निभाएगा अपनी असली भूमिका या साधेगा मौन?
सत्ता पक्ष की अपनी ब्रांडिंग है और विपक्ष के अपने तंज, लेकिन असली सवाल रायगढ़ के उस दमघोंटू पर्यावरण और प्रदूषित हो रही केलो नदी का है, जो उद्योगों का जहर पीने को मजबूर है।
याद दिला दें कि बीते पर्यावरण दिवस के दिन इसी जिले में बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण को लेकर रायगढ़ कांग्रेस ने पर्यावरण कार्यालय का जबरदस्त घेराव किया था। उस दिन कांग्रेस ने जिले के सबसे गंभीर मुद्दे पर जनता और सरकार दोनों का ध्यान आकर्षित कर एक मजबूत विपक्ष की उम्मीद जगाई थी।
लेकिन, अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस सिर्फ सोशल मीडिया पर वीडियो बयान जारी कर और व्यंग्य लिखकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेगी? क्या रायगढ़ कांग्रेस केलो नदी में उद्योगों द्वारा बेखौफ बहाए जा रहे जहरीले पानी और बेलगाम प्रदूषण के मुद्दे पर सत्ता पक्ष को सड़क से लेकर सदन तक घेरेगी या फिर इस ज्वलंत मुद्दे पर कुछ दिन बाद फिर से मौन साध लेगी?
रायगढ़ की जनता अब इस मुद्दे पर केवल रस्म अदायगी या ‘फोटो-ऑप’ नहीं चाहती। केलो को केवल दिखावे की नहीं, बल्कि उस औद्योगिक जहर से मुक्ति की सख्त जरूरत है, जिस पर बात करने से अक्सर व्यवस्थाएं कतराती नजर आती हैं। देखना होगा कि सत्ता की इस ‘सफाई’ और विपक्ष के ‘तंज’ के बीच केलो का असल उद्धार कब होता है!









