रायगढ़। जिले के बड़गांव के ग्रामीणों ने बीएस स्पंज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कथित अनियमितताओं को लेकर कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपी है। ग्रामीणों ने कंपनी पर शासकीय राजस्व भूमि पर कब्जा करने, बिना विधिवत सीमांकन के बाउंड्रीवॉल का निर्माण कराने और पेड़ों की कटाई शुरू करने का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में पहले भी प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
160 एकड़ जमीन की खरीद और ग्रामसभा प्रस्ताव की अनदेखी का आरोप
कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कंपनी संचालक ने गांव में करीब 160 एकड़ जमीन ग्रामीणों से कथित तौर पर बहला-फुसलाकर और वास्तविक जानकारी दिए बिना खरीदी है। इस जमीन पर स्पंज प्लांट स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, जमीन के डायवर्सन की प्रक्रिया के दौरान भी तथ्यों को छिपाया गया था। इस मामले को लेकर 6 अक्टूबर 2025 को तहसीलदार तमनार और एसडीएम घरघोड़ा को लिखित शिकायत दी गई थी।
ग्रामीणों का दावा है कि 26 नवंबर 2025 को ग्रामसभा में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया था। इस प्रस्ताव में निर्णय लिया गया था कि ग्रामसभा और ग्राम पंचायत की पूर्व अनुमति के बिना कंपनी किसी भी प्रकार का काम शुरू नहीं करेगी। इस प्रस्ताव की प्रतिलिपि संबंधित अधिकारियों के साथ-साथ कंपनी प्रबंधन को भी भेजी गई थी। इसके बावजूद कंपनी पर बिना विधिवत सीमांकन के बाउंड्री निर्माण और पेड़ों की कटाई कराने का आरोप है। ग्रामीणों ने 28 नवंबर 2025 को भी एसडीएम घरघोड़ा को इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी।
खसरा नंबर 145 के पुनः सीमांकन और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने शासकीय राजस्व भूमि के खसरा नंबर 145 का राजस्व अभिलेखों के आधार पर दोबारा सीमांकन और जांच कराने की मांग रखी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में कंपनी का अवैध कब्जा प्रमाणित होता है, तो भूमि को कब्जामुक्त कराकर जिम्मेदार लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही ग्रामसभा के प्रस्ताव का पालन सुनिश्चित कराने और पंचायत की मंजूरी के बिना काम रोकने का आग्रह किया गया है।
ग्रामीणों ने यह मांग भी रखी है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी ग्रामीण के खिलाफ बिना पर्याप्त जांच के कोई एकतरफा कार्रवाई न की जाए। गौरतलब है कि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों पर कंपनी प्रबंधन या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष फिलहाल सामने नहीं आया है।









