रायगढ़। शहर के रामलीला मैदान में आयोजित 10 दिवसीय चक्रधर समारोह में कलाकारों के चयन और आयोजन की दिशा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रसिद्ध लोक जसगीत गायक देवेश शर्मा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आरोप लगाया है कि 41 वर्षों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत वाले इस प्रतिष्ठित मंच को सिर्फ भीड़ जुटाने और मनोरंजन का माध्यम बनाया जा रहा है।
देवेश शर्मा के अनुसार, जिला प्रशासन हर वर्ष की तरह इस बार भी टेंट, लाइट, मंच और आवास जैसी व्यवस्थाएं संभाल रहा है, लेकिन कार्यक्रम की कलात्मक दिशा और गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चक्रधर समारोह कोई सामान्य म्यूजिकल नाइट नहीं है, बल्कि यह शास्त्रीय संगीत, लोककला और पारंपरिक धरोहर के सम्मान का मंच है।

कलाकारों के चयन और गायक अमित साना के नाम पर आपत्ति
समारोह में प्रस्तुति देने वाले कलाकारों के चयन पर सवाल उठाते हुए देवेश शर्मा ने गायक अमित साना के चयन को आयोजन की मूल प्रकृति के विपरीत बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी की गायकी की गुणवत्ता पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं है और अमित साना की प्रस्तुति राज्योत्सव या फिल्मी गीतों के मंचों के लिए उपयुक्त हो सकती है।
आपको बता दे की ऐतिहासिक शास्त्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रम में अमित साना ने मंच से “बीड़ी जलीय ले और जुम्मा चुम्मा जैसे गाने गए। उनका यह कार्यक्रम किसी सस्ते आर्केस्ट्रा और शादी पार्टी मे की गई परफॉर्मेंस के स्तर का था। जिसे लेकर काफी ज्यादा काफ़ी आलोचना हो रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि
“यह उनकी गायकी की गुणवत्ता पर टिप्पणी नहीं है। वे फिल्मी गीतों के मंच पर उपयुक्त हो सकते हैं और राज्य उत्सव जैसे कार्यक्रमों में उनकी प्रस्तुति रखी जा सकती है। लेकिन चक्रधर समारोह की अपनी सांस्कृतिक पहचान है।”
“अगर किसी कलाकार की मुख्य पहचान फिल्मी गीतों से है और वह सूफी, कव्वाली या शास्त्रीय संगीत की विशिष्ट विधाओं के लिए स्थापित नहीं है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि चक्रधर समारोह के मंच के लिए उसका चयन आखिर किस आधार पर किया गया?”
“कल अगर यही चयन प्रक्रिया चलती रही तो वह दिन दूर नहीं जब शास्त्रीय और लोक संगीत के इस प्रतिष्ठित मंच पर ऐसे गीत सुनाई देंगे जिनका इस समारोह की परंपरा से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं होगा।”
उन्होंने कहा कि जब कोई कलाकार मुख्य रूप से फिल्मी गीतों से जुड़ा हो और शास्त्रीय संगीत, सूफी या कव्वाली जैसी विधाओं के लिए स्थापित न हो, तो उसे इस मंच पर शामिल करने का आधार स्पष्ट होना चाहिए। शर्मा ने आशंका जताई कि यदि केवल भीड़ और मनोरंजन को ध्यान में रखकर चयन होता रहा, तो समारोह अपनी मूल शास्त्रीय पहचान खो देगा।
आयोजन से जुड़े जिम्मेदारों और मंच संचालन की भूमिका पर सवाल
प्रेस विज्ञप्ति में आयोजन समिति से जुड़े कुछ प्रमुख लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। देवेश शर्मा ने कहा कि आयोजन की कमान संभाल रहे एक प्राचार्य और एक प्रोफेसर की सक्रियता पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या वे आयोजन के चलते अपने मूल संस्थानों की जिम्मेदारियों से समझौता कर रहे हैं।
उन्होंने मंच संचालन को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि चक्रधर समारोह का मंच किसी व्यक्ति विशेष के लंबे वक्तव्यों या प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि कलाकारों और कला की प्रस्तुति के लिए है। शर्मा ने जोर देकर कहा कि 41 साल की विरासत रायगढ़ की जनता की सांस्कृतिक धरोहर है और प्रशासनिक भव्यता के बीच कला के वास्तविक स्तर को बचाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है।









