रायगढ़। शहर और आसपास के इलाकों में कॉलोनाइजरों द्वारा विकसित की जा रही कॉलोनियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षित भूमि को शासन के पक्ष में सुरक्षित करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर राजस्व विभाग द्वारा की गई जांच के बाद तीन कॉलोनाइजरों ने करीब 3 एकड़ ईडब्ल्यूएस भूमि रजिस्ट्री के माध्यम से शासन के पक्ष में हस्तांतरित कर दी है। इसके साथ ही रायगढ़ अनुभाग में अब तक कुल मिलाकर लगभग 13 एकड़ ईडब्ल्यूएस भूमि सुरक्षित की जा चुकी है।
राजस्व विभाग के अनुसार, इस पूरी कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों के लिए तय भूमि को सुरक्षित रखना और उसका नियमानुसार उपयोग सुनिश्चित करना है।
इन कॉलोनाइजरों ने रजिस्ट्री के जरिए सौंपी जमीन
प्रशासन की जांच और निर्देशों के तहत तीन कॉलोनाइजरों ने विगत माह ईडब्ल्यूएस भूमि की रजिस्ट्री शासन के नाम पर की। इनमें सांई आनंद विहार ने ग्राम जोरापाली के खसरा नंबर 15000 में से 0.341 हेक्टेयर भूमि शासन को सौंपी है।
इसके अलावा हाईटेक बिल्डर एंड डेवलपर्स ने ग्राम बड़े अतरमुड़ा के खसरा नंबर 15002/1 में स्थित 0.483 हेक्टेयर और स्वर्णभूमि बिल्डर्स ने ग्राम पण्डरीपानी के खसरा नंबर 56/1 एवं 56/2 में दर्ज 0.428 हेक्टेयर भूमि शासन के पक्ष में ईडब्ल्यूएस मद में रजिस्ट्री कर हस्तांतरित की है।
17 में से 12 कॉलोनाइजरों की जांच में मिली थी 10 एकड़ से अधिक जमीन
रायगढ़ अनुभाग में कुल 17 कॉलोनाइजर चिन्हित किए गए थे। इनमें से पहले चरण में 12 कॉलोनाइजरों के ईडब्ल्यूएस भूमि संबंधी अभिलेखों की जांच की गई थी। इस जांच के दौरान पण्डरीपानी, बड़े अतरमुड़ा, पुसौर, छींच और गोपालपुर सहित अन्य गांवों में कुल 10 एकड़ 12 डिसमिल ईडब्ल्यूएस भूमि पाई गई, जिसे राजस्व अधिकारियों ने सुरक्षित कर अपने कब्जे में लिया था।
वहीं शेष 5 कॉलोनाइजरों के अभिलेखों में ईडब्ल्यूएस भूमि की स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) रायगढ़ ने संबंधितों को नोटिस जारी कर भूमि से जुड़े रिकॉर्ड और पूरा लेखा-जोखा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
शेष प्रकरणों में भी जारी रहेगी जांच
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने 1 सितंबर 2025 को जिले के सभी राजस्व अधिकारियों को ईडब्ल्यूएस भूमि से संबंधित अभिलेखों की पड़ताल कर जमीन सुरक्षित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद रायगढ़ अनुभाग की रायगढ़ और पुसौर तहसील में अभिलेखों की सघन जांच शुरू की गई थी।
राजस्व विभाग ने बताया कि ईडब्ल्यूएस भूमि से संबंधित दस्तावेजों की जांच और आवश्यक कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी। शेष प्रकरणों में भी अभिलेखों का परीक्षण कर नियमानुसार आगे कदम उठाए जा रहे हैं।









