रायगढ़। जिले में शासकीय पट्टे की जमीनों के अवैध क्रय-विक्रय का मामला सामने आया है, जहां नियमों के विपरीत स्थानीय उप-पंजीयक कार्यालय को बायपास कर सीधे जिला पंजीयक कार्यालय से रजिस्ट्री कराई गई। स्थानीय उप-पंजीयक द्वारा विवादित या प्रतिबंधित भूमि के पंजीयन से इंकार किए जाने के बाद यह रजिस्ट्री जिला मुख्यालय से कराई गई। इसके साथ ही शासन की स्वतः म्यूटेशन प्रणाली के चलते जमीन का नामांतरण भी हो गया।
स्थानीय धरमजयगढ़ कार्यालय छोड़ जिला मुख्यालय में कराई गई रजिस्ट्री
यह मामला जिले के धरमजयगढ़ ब्लॉक अंतर्गत छाल तहसील क्षेत्र के ग्राम देउरमार का है। देउरमार स्थित खसरा नंबर 5/2/ख, जिसका कुल रकबा 1.4610 हेक्टेयर है, का क्रय-विक्रय पंजीयन स्थानीय धरमजयगढ़ उप-पंजीयक कार्यालय के बजाय 5 मार्च 2024 को सीधे रायगढ़ जिला पंजीयक कार्यालय में कराया गया। स्थानीय कार्यालय को छोड़कर जिला स्तर पर गुपचुप तरीके से पंजीयन कराने की इस प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

दस्तावेजों में अहस्तांतरणीय दर्ज होने के बावजूद हुआ क्रय-विक्रय
दस्तावेजों की पड़ताल के अनुसार, ग्राम देउरमार स्थित यह भूमि मूल रूप से 1957-58 के अधिकार अभिलेख के तहत जागरसाय पिता रोन्हा को कृषि कार्य के उद्देश्य से शासकीय पट्टे पर आवंटित की गई थी। वर्ष 2001 के शासकीय रिकॉर्ड के कैफियत कॉलम में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि यह भूमि शासकीय पट्टे की है और पूर्णतः अहस्तांतरणीय है, जिसे बेचा या स्थानांतरित नहीं किया जा सकता।
प्रतिबंधित और अहस्तांतरणीय होने के बावजूद नियमों की अनदेखी कर जिला पंजीयक कार्यालय में इसका क्रय-विक्रय दर्ज कर लिया गया। रजिस्ट्री के उपरांत स्वतः म्यूटेशन की प्रक्रिया के तहत अब यह जमीन रायगढ़ निवासी अविनाश कुमार एवं मुस्ताक मोहम्मद के नाम पर दर्ज हो चुकी है।









