रायगढ़। जिले के खनिज प्रभावित (Mining Affected) क्षेत्रों के विकास को तेज गति देने के लिए सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) शासी परिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी की अध्यक्षता और जिले के सांसदों-विधायकों की मौजूदगी में हुई इस बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 104 करोड़ रुपये से अधिक के 392 विकास कार्यों को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई है। इस बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ आगामी 5 वर्षों के लिए 254 करोड़ रुपये की दीर्घकालिक कार्ययोजना पर भी मुहर लगाई गई।
हाइलाइट्स
- कलेक्टर की अध्यक्षता में DMF शासी परिषद की बैठक संपन्न, 104 करोड़ 7 लाख रुपये के 392 कार्यों को मिली मंजूरी
- बैठक में सांसद, राज्यसभा सांसद और धरमजयगढ़-लैलूंगा के विधायकों ने वनांचल क्षेत्रों के मुद्दे किए शामिल
- जर्जर स्कूल, आश्रम-छात्रावास और आंगनबाड़ी केंद्रों के नए निर्माण और मरम्मत को दी गई सर्वोच्च प्राथमिकता
- हाथी विचरण प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा और सुगम आवागमन के लिए सड़कों के निर्माण पर विशेष फोकस
- धरमजयगढ़, लैलूंगा और घरघोड़ा में स्थापित होंगी ‘फूड और एग्री प्रोसेसिंग यूनिट’, 60% पैसा देगा DMF
- आगामी 5 वर्षों के विजन को ध्यान में रखते हुए 254 करोड़ रुपये के 1246 कार्यों का मास्टर प्लान तैयार
जर्जर स्कूलों और आश्रमों का होगा कायाकल्प
बैठक के दौरान लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया, राज्यसभा सांसद देवेन्द्र प्रताप सिंह, धरमजयगढ़ विधायक लालजीत सिंह राठिया, लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार और जिला पंचायत अध्यक्ष शिखा रविन्द्र गबेल ने अपने-अपने क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति रखी। जनप्रतिनिधियों ने विशेषकर वनांचल क्षेत्रों में जर्जर हो चुके स्कूल भवनों, आश्रम-छात्रावासों और स्वास्थ्य केंद्रों का मुद्दा उठाया। आपसी चर्चा के बाद इन भवनों के तत्काल सुधार और नए भवनों के निर्माण को वार्षिक कार्ययोजना में शामिल कर लिया गया।
प्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष फोकस
शासन की गाइडलाइन के मुताबिक, प्रत्यक्ष उत्खनन प्रभावित क्षेत्रों (लैलूंगा, धरमजयगढ़, घरघोड़ा, तमनार एवं छाल) में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और भौतिक अधोसंरचना को प्राथमिकता दी गई है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने लोक निर्माण विभाग (PWD) को कुछ भवनों की तकनीकी रिपोर्ट जल्द पेश करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि DMF के निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा और इसका सीधा लाभ आम आदमी तक पहुंचना चाहिए।
हाथी प्रभावित इलाकों में बनेंगी सड़कें, खुलेंगी प्रोसेसिंग यूनिट
इस बैठक में दो बेहद अहम और दूरगामी फैसले लिए गए। पहला, जिले के हाथी विचरण प्रभावित (Human-Elephant Conflict) क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित आवागमन देने के लिए सड़कों के निर्माण और उन्नयन (Upgradation) को प्राथमिकता सूची में डाला गया। दूसरा, भारत सरकार के सहयोग से धरमजयगढ़ में एग्री प्रोसेसिंग यूनिट, लैलूंगा में जन औषधि/मेडिसिनल यूनिट और घरघोड़ा में एक अन्य यूनिट स्थापित की जाएगी। इन परियोजनाओं का 60% खर्च DMF फंड से उठाया जाएगा।
अगले 5 साल के लिए 254 करोड़ का मास्टर प्लान
अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में DMF मद में लगभग 125 करोड़ रुपये मिलने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए, आगामी पांच वर्षों के लिए 1246 विकास कार्यों की 254.03 करोड़ रुपये की एक संभावित कार्ययोजना (Perspective Plan) तैयार कर उसका अनुमोदन किया गया है। साथ ही, पिछली बैठक (30 अक्टूबर) में पास हुए 150 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की विभागवार समीक्षा कर उनकी प्रगति भी जांची गई।



