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रायगढ़: सोनोग्राफी सेंटर की लूट पर फूटा जनता का गुस्सा! फेसबुक पर लोगों ने खोले राज- “डॉक्टरों का बंधा है कमीशन, एक्स्ट्रा पैसे देने पर लगता है नंबर”

रायगढ़। शहर के नामी ‘डॉ. आलोक केडिया सोनोग्राफी सेंटर’ (Dr. Alok Kedia Sonography Center) में मरीजों से हो रही खुली लूट और प्रताड़ना का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। एक पीड़ित द्वारा सेंटर के बाहर से किए गए फेसबुक लाइव के बाद अब सोशल मीडिया पर रायगढ़ की जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। क्षमता से कई गुना ज्यादा मरीजों की बुकिंग, घंटों का इंतजार और जल्दी नंबर लगाने के लिए 400-500 रुपये की ‘वीआईपी रिश्वत’ के खेल पर अब खुद मरीजों और उनके परिजनों ने मुहर लगा दी है। सोशल मीडिया पर आए सैकड़ों कमेंट्स ने शहर के प्राइवेट डॉक्टरों और सोनोग्राफी सेंटर के बीच चल रहे ‘कमीशनखोरी’ के उस काले सच को भी बेनकाब कर दिया है, जिसकी कीमत गरीब और मजबूर मरीजों को चुकानी पड़ रही है। कितने मरीज इस लम्बे इंतज़ार और ‘बस थोड़ी देर में नंबर आएगा’ के खेल से मानसिक प्रताड़ना से तंग होकर पैसा छोड़कर जाने में ही भलाई समझते है , इसमें भी सेंटर का ही फायदा होता है।

हाइलाइट्स

  • डॉ. आलोक केडिया सोनोग्राफी सेंटर में 1200 रुपये से अधिक की फीस लेने के बाद भी मरीजों को कराया जा रहा घंटों इंतजार
  • फेसबुक लाइव के बाद कमेंट बॉक्स में उमड़ा जनता का दर्द, लोगों ने साझा किए अपने खौफनाक अनुभव
  • रितेश तिवारी नामक युवक का खुला दावा: “मैंने खुद 500 रुपये एक्स्ट्रा दिए, तब जाकर मेरा नंबर लगा”
  • शहर के प्राइवेट और सरकारी डॉक्टरों पर गंभीर आरोप, कमीशन के लालच में मरीजों को सिर्फ ‘केडिया’ के पास भेजने का खेल
  • सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक बैठे रहने और स्टाफ की बदतमीजी से तंग आकर कई मरीज अपना पैसा छोड़कर जा रहे वापस
  • घंटों लंबा इंतजार: मरीजों को इतना प्रताड़ित किया जाता है कि वे अपना पैसा छोड़कर जाने में भलाई समझते हैं

1200 की फीस और ‘वीआईपी नंबर’ के लिए 500 की घूस

केडिया सोनोग्राफी सेंटर में जांच की फीस 1200 रुपये से शुरू होती है, जिसे सबसे पहले काउंटर पर जमा करवा लिया जाता है। इसके बाद मरीजों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। फेसबुक लाइव वीडियो में नरेंद्र चौबे ने आरोप लगाया था कि 4 मरीजों के बाद जल्दी नंबर लगाने के लिए 400 रुपये अतिरिक्त मांगे जाते हैं।

इस बात की पुष्टि तब हो गई जब रितेश तिवारी नामक एक शख्स ने कमेंट करते हुए सरेआम लिखा, “मैं खुद 500 दिया तब मेरा नंबर लगा भैया।” रवि पटेल ने भी लिखा, “400 एक्स्ट्रा देने वालों की वैल्यू है वहां, बाकी सबके टाइम की वैल्यू नहीं है।” यह साफ दर्शाता है कि सेंटर के अंदर ‘घूसखोरी’ का एक समानांतर सिस्टम चल रहा है।

‘कमीशन का खेल’: डॉक्टरों की मिलीभगत बेनकाब

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बदइंतजामी के बाद भी मरीज यहीं क्यों आते हैं? जनता ने सोशल मीडिया पर इस नेक्सस (Nexus) की भी पोल खोल दी है। राजेश प्रसाद नामक यूजर ने लिखा, “रायगढ़ के सभी डॉक्टर केडिया के पास का ही रिपोर्ट सही होता है, बोलकर भेजते हैं।” वहीं कुमार मनीष ने सीधा आरोप लगाया, “सरकारी डॉक्टर, प्राइवेट डॉक्टर सब केडिया का पर्चा लिखकर देते हैं क्योंकि सबका कमीशन बंधा हुआ है।”

जनता का छलका दर्द: “सुबह 10 बजे पैसा दिया, शाम 5 बजे नंबर आया”

फेसबुक पर दर्जनों लोगों ने अपने कड़वे अनुभव साझा किए हैं। आर.के. सिदार लिखते हैं, “मैं खुद अपनी पत्नी के साथ सुबह 10 बजे रजिस्ट्रेशन फीस देकर बैठा था, शाम 5 बजे के बाद ही सोनोग्राफी हुई। ये मजबूरी का बड़ा फायदा उठाते हैं।”

रूपेश वारेन का दर्द भी कुछ ऐसा ही था, “2 साल पहले मैं भी गया था, सुबह 10 बजे से नंबर लगाए, शाम 6 बजे अल्ट्रासाउंड हुआ। उसी दिन कसम खा ली थी कि दोबारा कभी नहीं जाऊंगा।” कला केरकेट्टा ने इस सर्विस को ‘घटिया’ बताते हुए लिखा कि पैसा पहले ले लेते हैं और घंटों इंतजार करवाते हैं। विकास पांडे नामक यूजर ने तो यहां तक दावा किया कि डॉक्टर कई बार ‘गलत रिपोर्ट’ भी दे देते हैं।

बिना पैसे एंट्री नहीं, झांसे में रखते हैं

जानकारी के अनुसार, इस सेंटर में इलाज से पहले पैसों की वसूली पर पूरा फोकस होता है। किसी भी मरीज की बिना एडवांस पेमेंट के एंट्री नहीं होती। सोनोग्राफी का चार्ज 1200 रुपये से शुरू होता है। दूर-दराज के गांवों से आए मरीजों को पहले इस झांसे में रखा जाता है कि उनका नंबर जल्दी आ जाएगा, और इस तरह उनसे पहले ही पैसे जमा करवा लिए जाते हैं।

क्षमता से ज्यादा पर्ची और ‘No Refund’ का खेल

पैसों की भूख इस कदर हावी है कि सेंटर को अपनी क्षमता (Capacity) का पता होने के बावजूद, वे दिन भर में लिमिट से कई गुना ज्यादा मरीजों की पर्ची काट देते हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सेंटर ने अपनी रसीद पर और अंदर एक बोर्ड लगाकर इस बात को हाईलाइट किया हुआ है कि “पैसा वापस नहीं होगा” (No Refund)। यानी एक बार उन्होंने आपको झांसे में लेकर पैसे ले लिए, तो आप उनकी शर्तों में पूरी तरह फंस जाते हैं।

प्रताड़ना ऐसी कि पैसा छोड़कर भाग रहे मरीज

पैसा जमा करने के बाद मरीजों और उनके परिजनों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। सुबह 10 बजे पैसा देने वाला मरीज शाम के 6 बजे तक दर्द से तड़पता रहता है। इस लंबे इंतजार और सेंटर के स्टाफ की बदतमीजी से मरीज इस कदर प्रताड़ित हो जाते हैं कि उनका सब्र टूट जाता है। अंत में, ‘पैसा वापस नहीं होगा’ वाले नियम के सामने मजबूर होकर, कई मरीज अपना जमा किया हुआ 1200 से ज्यादा का पैसा सेंटर में ही छोड़कर, बिना सोनोग्राफी कराए वापस लौटने में भलाई समझते हैं। सेंटर संचालक इसी ‘फ्री के पैसे’ और मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं।

मरीजों के परिजनों की इन आपबीतियों और लाइव वीडियो में सीएमएचओ (CMHO) को की गई शिकायत के बाद भी अगर स्वास्थ्य विभाग आंखें मूंदे रहता है, तो यह ‘सिस्टम’ की नाकामी का सबसे बड़ा उदाहरण होगा। अब देखना है कि प्रशासन इस ‘मेडिकल लूट’ पर कब और क्या कार्रवाई करता है या वो भी इसका हिस्सा बन जायेगा..?

फेसबुक की लाइव पोस्ट पर लोगो का कमेंट

नरेंद्र चौबे की लाइव पोस्ट

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