विपक्ष जिंदा है या ‘अडानी’ से हो गई सेटिंग? राहुल गांधी के ‘जल-जंगल-जमीन’ के नारों की रायगढ़ में निकली हवा, सोशल मीडिया पर कांग्रेस की थू-थू
रायगढ़। “जल, जंगल और जमीन हमारी है, हम अडानी को नहीं देंगे”—दिल्ली में राहुल गांधी का यह डायलॉग खूब तालियां बटोरता है। लेकिन छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में जब हकीकत में अडानी की कंपनी और पुलिस का सिस्टम मिलकर किसानों की जमीन छीनते हैं, तो यही कांग्रेस पार्टी और उसके बड़े नेता ‘मौन व्रत’ धारण कर लेते हैं। गेजामुड़ा में जमीन मुआवजे की लड़ाई लड़ रहे किसानों के साथ पिछले दो दिन में जो बर्बरता हुई, उस पर रायगढ़ से लेकर रायपुर तक बैठे विपक्ष के नेताओं ने अपने होठों पर ताला जड़ लिया है।

हाइलाइट्स
- गेजामुड़ा में अडानी रेल लाइन का विरोध कर रहे किसानों को विपक्ष ने छोड़ा राम भरोसे
- कोतरा रोड थाने के बाहर रातभर धरने पर बैठे रहे ग्रामीण, पास के होटल में रुके थे पीसीसी चीफ दीपक बैज
- चंद कदम चलकर किसानों से मिलने नहीं गए दीपक बैज, पत्रकारों के सवाल पर दिया गोलमोल जवाब
- खरसिया विधायक उमेश पटेल और जिला कांग्रेस संगठन की दो दिन बाद भी चुप्पी ने खड़े किए बड़े सवाल
- सोशल मीडिया पर भड़की जनता और स्थानीय लोग पूछ रहे- ‘विपक्ष जिंदा है क्या? अडानी का दलाल कौन?’
बगल में रोते रहे ग्रामीण, AC होटल में सोते रहे प्रदेश अध्यक्ष
इस पूरे मामले में विपक्ष की भूमिका सबसे ज्यादा शर्मनाक रही। जिस रात कोतरा रोड थाने के बाहर ग्राम गेजामुड़ा के किसान, बुजुर्ग महिलाएं और दुधमुंहे बच्चे खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठे थे और इंसाफ की गुहार लगा रहे थे, उसी रात वहां से चंद मिनटों की दूरी पर स्थित एक शानदार होटल में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष (PCC Chief) दीपक बैज रात्रि विश्राम कर रहे थे।

उनके साथ रायगढ़ के पूर्व कांग्रेसी विधायक प्रकाश नायक, चंद्रपुर विधायक रामकुमार यादव, रायगढ़ के दोनों जिला अध्यक्ष शाखा यादव और नगेंद्र नेगी भी कैमरे के सामने मौजूद थे। अगले दिन सुबह जब पत्रकारों ने दीपक बैज से गेजामुड़ा के किसानों और अडानी के बाउंसरों को लेकर सवाल पूछा, तो वे पूरी तरह से कन्नी काट गए। उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कह दिया कि “प्रशासन को जाकर बात करनी चाहिए”। लेकिन खुद चंद कदम चलकर उन किसानों के आंसू पोंछने या उनके समर्थन में खड़े होने की जहमत नहीं उठाई। दिन-रात ‘अडानी-अडानी’ की माला जपने वाली कांग्रेस के पीसीसी चीफ अडानी का नाम लेने में भी कतराते रहे। खोखले आश्वासन दिए कि हम उनके साथ रहेंगे! मगर 48 घंटे बाद भी एक कांग्रेसी नहीं दिखा! ग्राउंड में मिलना या एक प्रेस विज्ञप्ति भी तो दूर की बात है, सोशल मीडिया में किसी ने उन किसानों के पक्ष में पोस्ट भी नहीं किया। नीचे देखिए पीसीसी चीफ का बयान
खरसिया विधायक और जिला कांग्रेस भी ‘अंडरग्राउंड’
गेजामुड़ा मामला सीधे तौर पर खरसिया विधानसभा से जुड़ा है, जो पूर्व मंत्री और कांग्रेस के कद्दावर स्थानीय विधायक उमेश पटेल का गृह क्षेत्र है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि पुलिस के बल प्रयोग, अडानी के बाउंसरों की गुंडागर्दी और किसानों को गाड़ियों में भरकर हिरासत में लिए जाने के दो दिन बाद भी ना तो स्थानीय विधायक उमेश पटेल का कोई बयान आया है और ना ही रायगढ़ जिला कांग्रेस कमेटी ने इसका कोई विरोध किया है। वही सोशल मीडिया पोस्ट से पता चलता है कि उसे दिन जब गेजामुडा में पूरी फोर्स अदानी की रेल लाइन बनाने में जुटी हुई थी, महिलाओं, बच्चों बुजुर्गों को गिरफ्तार कर गाड़ी में भरा जा रहा था। उस वक्त उनके विधायक कार्यकर्ताओं की टोली लेकर बिलासपुर जलाशय का टूटा हुआ गेट देखने गए थे।

सोशल मीडिया पर जनता पूछ रही- ‘अडानी का दलाल कौन?’
विपक्ष की इस रहस्यमयी चुप्पी ने अब सोशल मीडिया पर भूचाल ला दिया है। आम जनता और युवा खुलकर कांग्रेस की खिंचाई कर रहे हैं। फेसबुक पर पत्रकार सत्यजीत घोष लिखते हैं कि — “विपक्ष जिंदा है क्या? संदर्भ गेजामुड़ा”।

एक अन्य पोस्ट में पत्रकार सुरेंद्र चौहान ने तीखा तंज कसा गया है— “बड़ा सवाल… अडानी का दलाल कौन? सत्ता बच नहीं सकता और विपक्ष चुप नहीं रह सकता।”

लोगों का सीधा आरोप है कि कांग्रेस ने न्याय के नाम पर समझौता कर लिया है और जहां कंपनी का सवाल आता है, वहां विपक्ष के नेता दुम हिलाने लगते हैं। इसी बात को लेकर किसान नेता लल्लू सिंह ने कहा है कि

सोशल मीडिया में भाजपा का झंडा बुलंदी से थामे रहने वाले बप्पी पंडित भी, इस घटना से दुखी दिखे। रायगढ़ के विधायक और खरसिया के पूर्व प्रत्याशी रहे, वित्त मंत्री ओपी चौधरी पर भी उन्होंने निशाना साधा और कहा कि कांग्रेस के साथ अब भाजपा भी गर्त में जा रही है।

जनता जनार्दन सब देख रही है
सिस्टम और कंपनियों के गठजोड़ में रायगढ़ का आम आदमी पिस रहा हैं। लेकिन जब सत्ताधारी सिस्टम तानाशाही पर उतर आए, तो उम्मीद विपक्ष से ही होती है। दुर्भाग्य से, रायगढ़ में विपक्ष ने अपनी आंख, कान और मुंह तीनों बंद कर लिए हैं। जनता अब समझ चुकी है कि दिल्ली के मंचों से ‘अडानी-अडानी’ चिल्लाना सिर्फ एक राजनीतिक नौटंकी है, क्योंकि जब रायगढ़ के गेजामुड़ा में अडानी के खिलाफ लड़ने का वक्त आया, तो पूरी कांग्रेस पार्टी ने हथियार डाल दिए।



