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रायगढ़ जोगीडीपा विस्थापन: ‘गरीब उजड़ेंगे और अमीर पनपेंगे’, हटरी चौक – सुभाष चौक का जाम छोड़कर ‘कैनाल रोड’ पर क्यों दौड़ रहा विकास का बुलडोजर?

रायगढ़ में पिछले दो ढाई साल से विकास के नाम पर ‘ज़मीन’ का अलग ही लेवल का खेल चल रहा है। शहर के बाहर उद्योगों के नाम पर गांव के गांव साफ़ हो रहे हैं तो, शहर के भीतर गरीब और कमजोरों की बस्तियां उजाड़ दी जा रही है। फिलहाल हम आज बात रायगढ़ शहर की करेंगे.. एक साल पहले ठीक इसी समय ‘प्रगति नगर कांड’ तो सबको याद होगा.. किस तरह जुटमिल के नए मालिकों के हाउसिंग प्रोजेक्ट के जरूरी ‘सड़क’ लिए बर्बरता से दशकों पुरानी बस्ती ही साफ कर दी गई.. और आज बारी इंदिरा नगर जोगीडीपा बस्ती की है!

उजड़ते हुए प्रगति नगर का दृश्य

वही पैटर्न ‘गरीब उजड़ेंगे और अमीर पनपेंगे’

कहानी और पैटर्न फिर से वही है.. ‘गरीब उजड़ेंगे और अमीर पनपेगे!’  उस समय प्रगति नगर बस्ती को ‘मरीन ड्राइव’ का नाम देकर विकास का बुलडोजर चला दिया गया तो अब जोगीडीपा मे ‘कैनाल लिंक रोड’ के नाम से वही ‘बुलडोजर’ वापस आ रहा है। इस बार भी वही आरोप है, रसूखदार कॉलोनाइजर और सहभागी मित्रों की जमीन को चौड़ा रास्ता और तगड़े मुआवजे का खेल! इस बार प्लान थोड़ा अपग्रेड है.. इस बार ‘साहब’ के मित्रों को सरकारी रकम के लीगल बंदरबाट से एक्स्ट्रा इंकम भी होगी!

रायगढ़ नगर निगम कार्यालय में बैठे जोगीडीपा के पीड़ित

विरोध..?

ऐसा नहीं कि इस बार विरोध नहीं हुआ, सैकड़ो प्रभावित लोग निगम दफ्तर पहुंचे, मिन्नते की! लेकिन प्रगति नगर कांड से सबक लेकर और राजनीतिक नौटंकी के आगे उन्होंने हार मान ली! चुपचाप शहर से बाहर शासन की दी हुई विरान पड़े मकानों मे फिर से दोबारा शुरुआत करने का निर्णय ले लिया है… विस्थापन का कार्य हो रहा है निगम प्रशासन भी मदद कर रहा है।

शहर से बाहर सूर्य विहार विस्थापित होते प्रभावित

रहस्यमई रायगढ़ कांग्रेस और भाजपा की ‘पितामहीं मजबूरी’

राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो विपक्ष में बैठी कांग्रेस का ‘विरोध’ एक पानी का बुलबुला है, जो सतह पर आने से पहले ही खत्म हो जाता है! सत्ता में बैठे फायदेमंद चंद लोगों को छोड़ दिया जाए तो बाकी भाजपा नेताओ (जिनके मुंह में आवाज थी) की स्थिति तो ‘भीष्म पितामह’ जैसी है जो अपने ही प्रतिज्ञा और वचन से बंधे हैं और ना चाहते हुए भी दुर्योधन का साथ देना है.. चाहे सामने अपने या भगवान ही क्यों ना हो!

कांग्रेस ने इस बार विरोध के नाम पर ज्वाइंट कमेटी बनाकर मामले की जांच की बात कही.. जांच भी हुई मगर जांच में क्या निकला..?? किसी को कोई पता नहीं! यह आज भी एक रहस्य है, कहा जाता है प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजा गया है! कहावत वही है ‘जंगल में मोर नाचा किसने देखा..! ‘

एक सवाल आखिर कब..?

फिलहाल.. ‘वे चुपचाप जा रहे हैं!’ अपने दशकों पुराने आशियानों को छोड़कर.. मकान छोटा था, सुविधा नहीं थी.. मगर उनका बचपन, उनके पुरखों की यादे थी.. . अब सब सड़क पर होगी! पता नहीं इस  सड़क से अब किसका कितना फायदा होगा.. रायगढ़ का कितना ट्रैफिक बोझ कम होगा..?  यहां के विधायक और कथित विकास पुरुष ओपी चौधरी तो नए-नए हैं, लेकिन बात सड़क और जाम कि है तो रायगढ़ पुराने बाशिंदों  के मन में एक सवाल हमेशा से है..

“हटरी चौक  सुभाष चौक पर हर शाम लगने वाला जाम क्या इस कलयुग के अंत तक खत्म हो जाएगा..?? विकास की नौटंकी के नाम पर और कितनी बस्तियां उजाड़नी अभी बाकी हैं..?”

-आशीष शर्मा ( संपादक, RIG24)

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