रायगढ़। किरोड़ीमल धर्मदा ट्रस्ट का विवादों से चोली-दामन का साथ रहा है। शहर में फैली इसकी अथाह संपत्तियों के इस्तेमाल पर अक्सर तीखे सवाल उठते हैं। अब एक बार फिर, जिला कलेक्टर के आदेश पर इन संपत्तियों की नाप-जोख और जांच का काम चल रहा है।
धर्मशालाओं में खुल गए शोरूम
ट्रस्ट के पास शहर में ढाई सौ से ज्यादा मकान और कई धर्मशालाएं हैं। इनका मकसद सामाजिक भलाई था, लेकिन आज हकीकत बिल्कुल अलग है। मामूली किराये वाले इन ठिकानों पर अब करोड़ों का मुनाफा कूटने वाले धंधे और शोरूम चल रहे हैं।
2019 का वो वायरल वीडियो
इस खुले व्यवसायीकरण के खिलाफ शिकायतों और आंदोलनों का एक लंबा इतिहास रहा है। इसी कड़ी में साल 2019 का एक वीडियो सामने आया है। इसमें कांग्रेस के मौजूदा प्रदेश सचिव विभाष सिंह ठाकुर, कलेक्ट्रेट के बैरिकेड पर चढ़कर प्रशासन के खिलाफ दहाड़ रहे हैं।
‘रायगढ़ में बन गए हैं दो रायगढ़’
वीडियो में विभाष सिंह ठाकुर कहते हैं कि रायगढ़ में दो रायगढ़ बस गए हैं, एक गरीबों का और दूसरा ट्रस्ट में बैठे सेठ-साहूकारों का। उन्होंने आरोप लगाया कि यहां 36 ट्रस्ट हैं, लेकिन आज तक किसी एसडीएम या कलेक्टर ने इनकी जांच नहीं की।
अमीरों का कब्जा, अस्पताल तक बिके
विभाष के मुताबिक, आज तक किसी भी गरीब को ट्रस्ट का मकान नसीब नहीं हुआ है। बल्कि जो लोग भारी-भरकम इनकम टैक्स भरते हैं, वे मजे से ट्रस्ट के मकानों में रह रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यहां रोज संपत्तियों की खरीद-बिक्री हो रही है।
उस समय उन्होंने दावा किया कि आंख का अस्पताल और रूपेन पटेल का अस्पताल तक बिक गया है। हालत यह हो गई है कि बने हुए अस्पताल में आम लोगों को अंदर घुसने तक नहीं दिया जाता।
गरीबों का ट्रस्ट कर रहा अमीरों की दरबानी
2019 से लेकर आज तक हालात सुधरने के बजाय और बिगड़े ही हैं। उस वक्त जो इमारतें दो मंजिला थीं, वे अब तीन मंजिला कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बन चुकी हैं। जिस ट्रस्ट को गरीबों का सहारा बनना था, वह आज अमीरी की चौखट पर दरबानी करता नजर आ रहा है।
रायगढ़ के लिए यह कोई नई कहानी नहीं है। हर बार शिकायत होती है, जांच होती है, और फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। कुछ साल बाद फिर यही चक्र दोहराया जाता है। अब देखना यह है कि प्रशासन की इस ताजा जांच से कोई ठोस नतीजा निकलता है या नहीं।









