रायगढ़। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के समक्ष 88 वर्षीय बुजुर्ग दंपति द्वारा पुत्र के खिलाफ भरण-पोषण और देखभाल न करने की शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने त्वरित वैधानिक कदम उठाया है। एसएसपी के निर्देश पर चक्रधरनगर थाना पुलिस ने पुत्र को थाने बुलाकर कड़ी फटकार लगाई और उसके कानूनी दायित्वों की जानकारी दी। इसके साथ ही मामले में अग्रिम कार्रवाई के लिए अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) रायगढ़ को प्रतिवेदन प्रेषित किया गया है।
पुलिस के अनुसार, 10 अक्टूबर को 88 वर्षीय सेवानिवृत्त लैब असिस्टेंट बैजनाथ पटनायक अपनी पत्नी साहेबानी पटनायक के साथ एसएसपी कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने अपने इकलौते जीवित पुत्र खीरसागर पटनायक के खिलाफ शिकायत प्रस्तुत की। दंपति ने बताया कि उनके दो बेटे और एक बेटी थे, जिनमें से छोटे बेटे का निधन हो चुका है और उसकी पत्नी मायके में रहती है। परिवार में एक दिव्यांग बेटी भी है। अधिक उम्र होने के कारण दोनों बुजुर्ग दैनिक कार्यों के लिए भी दूसरों पर निर्भर हैं।
भोजन-उपचार न देने और संपत्ति विवाद का आरोप
बुजुर्ग दंपति ने आरोप लगाया कि पुत्र खीरसागर पटनायक उन्हें भोजन-पानी उपलब्ध नहीं कराता और बीमारी की हालत में उचित इलाज भी नहीं करवाता है। इसके अलावा वह घर और जमीन के बंटवारे को लेकर लगातार विवाद करता है तथा उन्हें घर से निकालने की धमकी देता है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी ने चक्रधरनगर थाना प्रभारी को वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
निर्देश मिलने के बाद चक्रधरनगर पुलिस ने खीरसागर पटनायक को थाने तलब किया। इस दौरान शिकायतकर्ता दंपति भी थाने में उपस्थित थे। बातचीत के दौरान साहेबानी पटनायक की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिस पर पुलिस ने तत्काल तत्परता दिखाते हुए उन्हें अस्पताल पहुंचाया।
वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के तहत एसडीएम को भेजा गया मामला
थाने में उप निरीक्षक गेंदलाल साहू और एएसआई आशिक रात्रे ने खीरसागर पटनायक को उसके नैतिक और विधिक दायित्वों से अवगत कराया। पुलिस ने माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 के प्रावधानों के तहत विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर एसडीएम रायगढ़ को भेज दिया है। अब इस मामले में संबंधित प्राधिकारी दोनों पक्षों की सुनवाई कर नियमानुसार आगामी फैसला लेंगे।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने इस मामले पर कहा कि माता-पिता की सेवा और देखभाल करना प्रत्येक संतान का नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बुजुर्गों के भरण-पोषण और संरक्षण के लिए कड़े कानूनी प्रावधान मौजूद हैं और उनकी उपेक्षा करने वालों के विरुद्ध नियमों के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे।









