रायगढ़। कोतवाली थाना क्षेत्र में आपसी मारपीट की घटना को लूटपाट बताकर दर्ज कराई गई झूठी शिकायत की पोल पुलिस जांच में खुल गई है। मामले की विवेचना और गवाहों के बयानों के बाद प्रार्थी ने स्वयं स्वीकार किया कि उसने पुरानी रंजिश के कारण आरोपियों को फंसाने के लिए लूट की मनगढ़ंत कहानी गढ़ी थी। प्रार्थी द्वारा शपथ पत्र प्रस्तुत किए जाने के बाद पुलिस ने मामले से भारतीय न्याय संहिता (BNS) की लूट से संबंधित धारा हटा दी है।
कोतरारोड़ क्षेत्र के जयसिंह गली निवासी संजय दास (22) ने 9 अक्टूबर 2026 को कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया था कि 9 अक्टूबर की रात करीब 12:30 बजे रेलवे बंगला स्थित जगन्नाथ मंदिर के पास सागर यादव, शैलेश साहू और भोला नामक युवकों ने उसके साथ मारपीट की। प्रार्थी ने यह भी आरोप लगाया था कि आरोपियों ने उससे 5,000 रुपये और सोने की चेन छीन ली। इस रिपोर्ट पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 583/2026 के तहत धारा 115(2), 296, 315(3), 351(3), 309(6) और 3(5) BNS के तहत अपराध दर्ज किया था।
विवेचना में खुली झूठी लूट की पोल
मामले की जांच के दौरान कोतवाली थाना प्रभारी निरीक्षक अमित तिवारी ने जब प्रार्थी और मौके पर मौजूद गवाहों से पूछताछ की, तो घटना केवल मारपीट की पाई गई। लूटपाट को लेकर जब पुलिस ने बारीकी से पूछताछ की, तो प्रार्थी संजय दास टूट गया। उसने स्वीकार किया कि पुरानी रंजिश के चलते उसने आरोपियों को गंभीर मामले में फंसाने के लिए लूट की झूठी और बढ़ा-चढ़ाकर रिपोर्ट लिखवाई थी। इसके बाद प्रार्थी ने अपनी गलती मानते हुए थाने में शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया।
सच्चाई सामने आने के बाद पुलिस ने प्रकरण से लूट से संबंधित धारा 309(6) BNS को हटा दिया है। झूठी शिकायत दर्ज कराने को लेकर अब पुलिस प्रार्थी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई के लिए सक्षम न्यायालय में प्रतिवेदन प्रस्तुत कर रही है।
झूठी शिकायत करने वालों पर होगी कार्रवाई
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) शशि मोहन सिंह ने कहा कि किसी को फंसाने के मकसद से झूठी लूटपाट की रिपोर्ट दर्ज कराना कानून का खुला दुरुपयोग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाती है और झूठी शिकायत दर्ज कराने वालों के विरुद्ध भी अदालत में विधि सम्मत कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन पेश किया जाता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे पुलिस को सही जानकारी दें और कानून का सहारा लें, न कि उसका दुरुपयोग करें।









