रायगढ़, 7 जनवरी। इंदौर में दूषित पानी से फैले डायरिया प्रकोप और मौतों के बाद अब रायगढ़ में भी पेयजल पाइपलाइन की सुरक्षा को लेकर सवाल करना जरूरी हैं। आज वार्ड नंबर 32 जूटमिल–फटहामुड़ा की एक गली की तस्वीर सामने आई हैं। जिसमें नगर निगम की ड्रिंकिंग वॉटर पाइपलाइन खुली गंदी नाली के ठीक के भीतर से जाती नजर आ रही है। ऐसा नजारा रायगढ़ में कई जगह देखने को मिल जाएगा। ऐसे पाइप लाइंस को “रिस्क-पॉइंट” मानकर समय रहते सुधारा नहीं गया तो जो इंदौर में हुआ, रायगढ़ भी हो सकता है।
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इंदौर हादसा: प्रशासन के आंकड़े
PTI आधारित रिपोर्ट्स के अनुसार इंदौर के भगीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल के कारण डायरिया का प्रकोप फैला, जिसमें प्रशासन ने 6 मौतों की पुष्टि की थी। इन्हीं रिपोर्ट्स में बताया गया कि कुल 398 मरीज अस्पताल में भर्ती हुए, जिनमें से 256 डिस्चार्ज हुए और एक समय 142 मरीज अस्पतालों में इलाजरत थे, जिनमें 11 मरीज ICU में बताए गए।
इंदौर में “पानी कैसे बिगड़ा”
रिपोर्टिंग के मुताबिक इंदौर में समस्या पानी के “सोर्स” से ज्यादा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में सामने आई, जहां सीवेज ओवरफ्लो या गंदगी के पेयजल पाइपलाइन में घुसने की बात अधिकारियों ने मानी है। ऐसी घटनाएं आमतौर पर पाइपलाइन में लीकेज/क्रैक, जॉइंट ढीले होने या ड्रेनेज लाइन के बहुत पास से पाइप बिछने पर बढ़ती हैं।
रायगढ़ में कैसे हो सकता है इंदौर कांड
पानी के पाइप लाइन की इंदौर जैसी स्थिति यहां भी दिखाई देती है। अगर इसके वैज्ञानिक और तकनीकी दृष्टिकोण से बात की जाए, तो फील्ड के एक्सपर्ट बताते हैं कि इसमें तीन संभावित स्थिति में नाली के पानी का पीने के पाइप लाइन में मिलने का जोखिम बढ़ सकता है।
लीकेज के साथ सक्शन रिस्क: पानी की सप्लाई बंद और चालू होने में पाइप में प्रेशर बदलता है। इसी दौरान अगर पाइप में छोटा क्रैक या लीकेज हो और आसपास में नाली का गंदा पानी हो। तो ऐसी स्थिति में नाली का गंदा पानी ड्रिंकिंग वॉटर के पाइपलाइन के अंदर खींचने का जोखिम बना रहता है।
जॉइट या कनेक्शन फेलियर: इस स्थिति में भी नाली के किनारे एक्सपोज पाइपों में अगर कपलिंग या क्लैंप ढीले हों, तो कंटैमिनेशन का रास्ता बन सकता है।
क्रॉस कॉन्टमिनेशन जोन: जहां ड्रेनेज (नालियां) और पेयजल लाइनें एक ही कॉरिडोर में चलती हैं, वहां मरम्मत/खुदाई के दौरान गलत कनेक्शन या ब्रिच का खतरा रहता है।
हादसे के इंतजार से बेहतर ऐतिहात
फिलहाल तो यह स्थिति है जो हमने आपको बताई। यह एक जगह की बात नहीं है, शहर में ऐसे कई जगहे है, जिनकी इंदौर की घटना से सबक लेकर निशानदेही जरूरी है। ऐसी पाइपलाइन का लीकेज सर्वे और प्रेशर टेस्ट कराने की जरूरत है। नल के पानी के सैंपल लेकर coliform/E. coli जैसी जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए और जहां संभव हो वहां नाली के पास वाली लाइन को कवर या री-रूट करने जैसे प्रभावी कदम उठाने चाहिए। किसी हादसे के इंतजार करने से बेहतर है कि पहले से ही ऐतिहात बरता जाए।
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