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रायगढ़ में अफीम का कोई ‘ऑर्गेनाइज्ड गैंग’ नहीं! CSP मयंक मिश्रा का बड़ा खुलासा, पुलिस की अपील- अपनी बाड़ी से खुद उखाड़ फेंके गांजा-अफीम

रायगढ़। जिले के तमनार और लैलूंगा ब्लॉक में ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद मिली अफीम (Opium) की खेती को लेकर सोमवार को रायगढ़ कलेक्टर और एसएसपी शशि मोहन सिंह ने एक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस (Joint PC) की। इस पीसी में पुलिस ने साफ किया कि अब तक की जांच में जिले में किसी बड़े ‘संगठित गिरोह’ (Organized Syndicate) के शामिल होने की पुष्टि नहीं हुई है। सीएसपी (CSP) मयंक मिश्रा ने बताया कि सीमावर्ती और सुदूर इलाकों में लोग ‘अज्ञानता’ (Ignorance) के कारण भी इस अवैध फसल को उगा रहे हैं। प्रशासन ने अपील की है कि अगर किसी ने अज्ञानतावश ऐसी फसल लगाई है, तो वह उसे तुरंत स्वयं नष्ट कर दे।

हाइलाइट्स

  • रायगढ़ में अफीम की खेती को लेकर SSP और कलेक्टर ने ली महत्वपूर्ण जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस
  • CSP मयंक मिश्रा ने किया स्पष्ट, अब तक की जांच में किसी ‘संगठित गिरोह’ (Organized Gang) की पुष्टि नहीं
  • सुदूर और सीमावर्ती इलाकों में ‘अज्ञानता’ (Ignorance) के कारण भी अफीम उगाने की बात आई सामने
  • प्रशासन की अपील- यदि बाड़ी में है ऐसी संदिग्ध फसल तो ग्रामीण स्वयं कर दें नष्ट, वरना होगी सख्त कार्रवाई तमनार और लैलूंगा के 3 गांवों में कार्रवाई,
  • ‘एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स’ का गठन कर ड्रोन से हो रही निगरानी

‘सिंडिकेट’ नहीं, असंगठित है अफीम की खेती

जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते हुए सीएसपी मयंक मिश्रा ने बताया कि पुलिस ने पिछले कुछ दिनों में तमनार के आमाघाट (60,326 पौधे), लैलूंगा के नवीन घटगांव (2 डिसमिल) और मुड़ागांव (5 डिसमिल) में अफीम की खेती पकड़ी है। हालांकि, सीएसपी ने स्पष्ट किया कि, “अभी तक की जांच और विवेचना में किसी भी प्रकार के संगठित (Organized) या बड़े गैंग का पाया जाना साबित नहीं हुआ है।” उन्होंने बताया कि यह खेती मुख्य रूप से शहर से दूर, नदी-नालों के किनारे और सीमावर्ती इलाकों में छिटपुट रूप से की जा रही है।

‘अज्ञानता’ भी है एक बड़ा कारण, पुलिस चला रही जागरूकता अभियान

पीसी में एक और अहम बात सामने आई। सीएसपी ने बताया कि सुदूर ग्रामीण अंचलों में ‘लैक ऑफ नॉलेज’ (Lack of Knowledge) और अज्ञानता (Ignorance) के कारण भी लोग इसे उगा रहे हैं। कई ग्रामीणों को पता ही नहीं है कि उनके खेत या बाड़ी में जो फसल है, वह प्रतिबंधित अफीम है।

इसे देखते हुए पुलिस ने ‘एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स’ के तहत मुखबिर तंत्र को एक्टिव किया है। गांव के कोटवारों, सरपंचों और जनप्रतिनिधियों के व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि अफीम का पौधा कैसा दिखता है, ताकि वे इसे पहचान सकें।

प्रशासन की अपील- ‘खुद नष्ट कर दें, वरना होगी कार्रवाई’

कलेक्टर और एसएसपी के निर्देशन में प्रशासन ने जिले भर के ग्रामीणों से एक खास अपील की है। पुलिस ने कहा है कि जो लोग इस प्रतिबंधित खेती के बारे में नहीं जानते थे और उन्होंने अज्ञानतावश इसे अपनी बाड़ी या खेत में लगा लिया है, वे स्वयं ही इसे उखाड़कर नष्ट कर दें। प्रशासन अभी ड्रोन (Drone) के जरिए चप्पे-चप्पे पर नजर रख रहा है। यदि पुलिस के ड्रोन सर्वे या जांच में यह फसल पाई जाती है, तो फिर NDPS एक्ट के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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