रायगढ़. जुटमिल थाना के अंतर्गत आधी रात को एक महिला के घर घुसकर हुई बलात्कार की घटना ने सबको झंझोड़ कर रख दिया था। महिला द्वारा खुद सामने आकर जूटमिल पुलिस पर आरोप लगाया गया था कि एक हफ्ते बाद भी उसकी शिकायत पर कार्यवाही नहीं हो रही है बल्कि जूटमिल पुलिस आरोपी के पक्ष में बात कर रही है। मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद रायगढ़ के सीनियर पुलिस अफसरो ने तत्काल इस मामले में अपनी गंभीरता दिखाई और मीडिया में खबर आने के घंटे के भीतर ही स्वयं अपनी निगरानी में मामले में कार्यवाही करवाई गई।
इस पूरे मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सदानंद कुमार एवं नगर पुलिस अधीक्षक अभिनव उपाध्याय ने मामले को गंभीरता से लिया और थाना प्रभारी जुटमिल को तत्काल FIR करने का निर्देश दिया। यहां तक कि CSP अभिनव उपाध्याय ने मामले की गंभीरता को समझते हुए रात में ही स्वयं थाने पहुंच कर अपने मार्गदर्शन में कार्रवाई करवाई साथ ही आरोपी को पकड़ने के लिए एक टीम भी गठित की.
पीड़ित को रात में ही थाने बुलाकर महिला पुलिस के सामने उसका बयान दर्ज करवाया गया और मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज किया गया। पीड़ित महिला ने बताया कि अब वह पुलिस की कार्यवाही से काफी संतुष्ट है।

अफसरों की संजीदगी से कानून पर विश्वास बढ़ा
जिले के सीनियर पुलिस अधिकारियों द्वारा महिला संबंधित मामलों में इसी तरह गंभीरता से तत्काल संज्ञान लिया जाता रहा तो महिलाओं में सुरक्षा का भाव बढ़ेगा, यह बात और है कि जिले के ऐसे थानेदारों को महिलाओं की सुरक्षा, एवं महिला संबंधी अपराधों की रोकथाम के लिए तत्काल संज्ञान लेने वरिष्ठ अधिकारियों को क्लास लेने की आवश्यकता है. ताकि इस तरह घटनायें दुबारा न हो।
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एक अन्य मामले में पीड़िता को 2 माह बाद आज भी है न्याय की आस
इसी प्रकार एक अन्य मामले में भी पुलिस थाना प्रभारी रामकिंकर यादव की भूमिका आरोपी पक्ष को बचाने की रही है, घटनाक्रम को देखकर ऐसा कोई भी कह सकता है। इस मामले में पीड़िता ने अक्टूबर 2023 में थाना प्रभारी जूटमिल से अपने ही पति की गंभीर शिकायत की गई थी, जिसमें बताया गया था कि पीड़िता के पति ने उसकी नग्न तश्वीरों को सोसल मीडिया में वायरल करते हुए न केवल उसे बदनाम किया है बल्कि उससे ब्लैकमेलिंग भी कर रहा है।
पुलिस ने कहा हो गयी FIR मगर कुछ नही हुआ
पूरे सबूतों को थाना प्रभारी को देने के बाद जूटमिल पुलिस ने पीड़िता का बयान दर्ज किया और आरोपी का मोबाईल नंबर मांगा और यह कहा कि आप जाईये, हम आरोपी का बयान लेकर यह एफआईआर दर्ज कर देंगे। कुछ दिनों बाद पीड़िता ने जब एफआईआर की काॅपी मांगी तो उससे कहा गया कि उसकी शिकायत पर से जीरो नंबर पर एफआईआर दर्ज कर उसे ओड़िसा थाने में भेज दिया गया है।
2 माह बाद भी जब उक्त एफआईआर के संबंध में कोर्ट से कोई नोटिस नहीं आई तो पीड़िता को जूटमिल पुलिस पर संदेह हुआ और उसने दिनांक 29/01/2024 को फिर से जूटमिल थाने में पूछताछ की तब पता चला कि उसकी शिकायत पर पीड़िता के बयान तो दर्ज कर लिए गए लेकिन आज तक एफआईआर नहीं हुई। उक्त स्थितियों को देखकर यही लग रहा है कि इस शिकायत पर भी जूटमिल पुलिस ने स्वयं को आरोपी पक्ष के रूप में मानते हुए एफआईआर दर्ज नहीं किया है।
एक पीड़िता को तो आज रायगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की संजीदगी ने न्याय दे दिया लेकिन वहीं दूसरी पीड़िता 2 महीने बाद आज भी इन्हीं वरिष्ठ अधिकारियों की संजीदगी का इंतजार कर रही है. अब यह देखना होगा कि इस महिला को क्या न्याय मिल पाता है यह इस महिला को अभी कुछ महीने और न्याय के लिए इंतजार करना होगा.



