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तमनार आंदोलनकारी के लिए अच्छी खबर: जनसुनवाई निरस्त की प्रक्रिया शुरू करने का मिला आश्वासन

रायगढ़। जिले के तमनार क्षेत्र से एक बड़ी खबर निकलकर आ रही है। बीते 12 दिसंबर से धरने पर बैठे ग्राम वासियों की मांग पर प्रशासन ने कदम उठाते हुए जिंदल पावर की जनसुनवाई को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आज ग्राम वासियों का प्रतिनिधिमंडल, विधायक विद्यावती सिदार और प्रशासन की बीच हुई बैठक में यह फैसला लिया गया है। आज दोपहर करीब 2 घंटे से ज्यादा समय तक यह बैठक चली।

दुर्गा प्रसाद अधिकारी (IAS) एसडीएम घरघोड़ा मीडिया को बयान देते हुए बताया कि विधायक विद्यावति सिदार और ग्राम वासियों के प्रतिनिधि मंडल को विश्वास में  लेकर बताया गया कि जनसुनवाई निरस्त की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही धरना स्थल पर बैठे लोगों और ग्राम वासियों से उन्होंने शांति और कानून व्यवस्था को हाथ में न लेने की अपील की भी की है।

क्या हुआ था जानिए शुरू से

आपको बता दें कि जिंदल पावर को तमनार क्षेत्र में गारे पालमा बेल्ट की कोल माइंस आमंत्रित हुई थी। जिसमें 14 गांव प्रभावित थे। ग्रामीण लगातार माइंस का विरोध कर रहे थे और जनसुनवाई निरस्त करने की मांग की जा रही थी। इसके पहले प्रशासन के द्वारा जनसुनवाई को 15-20 दिनों के लिए टाल दिया गया था। उसके 8 दिसंबर नई तारीख जनसुनवाई के लिए घोषित की गई। 

8 दिसंबर से 3 दिन पहले ही प्रस्तावित स्थल पर 14 प्रभावित गांवों के लोग जनसुनवाई के विरोध बैठे थे, वहीं प्रशासन द्वारा दूसरी जगह पर जनसुनवाई सम्पन्न करा दी गई। इस दौरान भारी पुलिस बल भी था। ग्रामीणों ने इस जनसुनवाई को फर्जी करार दिया और 12 दिसंबर से आर्थिक नाकेबंदी और धरना प्रदर्शन के साथ तमनार के सीएसपी चौक पर सैकड़ो की संख्या में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हो रहा था।

इसी बीच कल शनिवार को पुलिस द्वारा धरना स्थल से कुछ दूरी आर्थिक नाकेबंदी को लेकर ग्रामीण और पुलिस के बीच कहा सुनी हुई। पुलिस का कहना था कि धरना स्थल पर आर्थिक नाकेबंदी है। यहां से औद्योगिक वाहनों को जाने दिया जाए। पुलिस करीब 30 40 लोगों को धमनार थाना ले आई। इसी दौरान एक औद्योगिक वाहन ने एक ग्रामीण को कुचल दिया। जिसके बाद से लोग उग्र हो गया और आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुई थी।

रायगढ़ जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, कमिश्नर, आईजी जैसे बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। शाम होते ही पुलिस द्वारा हिरासत में लिए लोगों को छोड़ दिया गया। लोग भी वापस धरना स्थल पर पहुंच चुके थे। और आज ग्रामीणों के प्रतिनिधि मंडल और प्रशासन के बीच बातचीत होनी थी।

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