छोड़कर सामग्री पर जाएँ

याद रखेगी पब्लिक रायगढ़ में 2026 की होली: क्योंकि बुरा ना मानो ये सिर्फ भाजपा वालों की होली है!

रायगढ़। फिलहाल रायगढ़ में ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। अब आप कहेंगे कि हमने खबर की शुरुआत मुहावरे से क्यों की? इसकी बहुत बड़ी वजह है जनाब! रायगढ़ में होली का पूर्व-उत्सव सिर्फ और सिर्फ भाजपा कार्यालय में मना, बाकी शहर की गलियां और चौक-चौराहे सूने रहे। और जिसने भी उत्सव मनाने की जुर्रत की, वहां रायगढ़ पुलिस पहुंच गई। इसकी शुरुआत हुई डिग्री कॉलेज के हमारे बच्चों से!

क्या क्रिमिनल और उद्दंडियों का शहर रायगढ..?

होली के एक हफ्ते पहले से अखबारों और पुलिस की प्रेस विज्ञप्तियों को देखकर ऐसा माहौल बना दिया गया मानो रायगढ़ वाकई क्रिमिनल और उद्दंडियों का ही शहर हो! प्रशासन ने संदेश दिया कि लोग होली के नाम पर हुड़दंग मचाते हैं, इसलिए सख्ती जरूरी है। इस सख्ती के खौफ से बदमाश-गुंडे तो दूर, आम आदमी भी सकते में आ गया।

आखिर चार दिन पहले ही डिग्री कॉलेज के बच्चों ने ‘अपराध’ टाइप से कुछ कर दिया था! कानूनन एसडीएम की परमिशन के बिना उन्होंने छुट्टी से पहले होली मिलन समारोह के नाम पर गाना-बजाना कर लिया था। बाप रे बाप… दिन दहाड़े साउंड बॉक्स बजा दिया!

‘अपराध’ इतना बड़ा था कि चक्रधर नगर पुलिस दलबल के साथ पहुंच गई। मामला मीडिया में हाईलाइट हो गया, जिसके वीडियो देखकर हम और आप सब सकते में थे।

इंस्टा लिंक

यूट्यूब मीडिया लिंक

घबराई जनता और सत्ताधारियों को ‘स्पेशल छूट’

इस पूरी घटना और प्रशासन के सख्त पहरे का आम आदमी के मन में ऐसा खौफ बैठा कि किसी चौक-चौराहे तो दूर, शायद ही किसी कॉलोनी में भी होली की मस्ती में डीजे या साउंड बॉक्स बजता दिखा हो।

​लेकिन, डीजे या साउंड बॉक्स बजा और महफिल सजी… तो सिर्फ भाजपा कार्यालय में! सोशल मीडिया में उसका वीडियो भी तगड़े से वायरल किया गया। वो भी रात के वक्त, दिन में नहीं! हो सकता है कि उन्हें एसडीएम ने परमिशन दी हो, लेकिन अगर एक आम आदमी वो कागज मांगने जाए, तो दावे के साथ कहा जा सकता है कि नहीं मिलेगा! यह बात अलग है कि खबर चलने के बाद आनन-फानन में बैकडेट का कागज बना दिया जाए।

लेकिन मामला जो भी हो, इस बार यह स्पष्ट साबित कर दिया गया कि एक आम आदमी और सत्ताधारी दल के आदमी के बीच एक बड़ा फर्क है। फिलहाल रायगढ़ में चल रही इस वास्तविक स्थिति और दोहरे रवैये को देखकर यही कहा जा सकता है कि…

“बुरा ना मानो, ये सिर्फ भाजपा वालों की होली है!”

ख़बर शेयर करें: