जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में शुक्रवार को हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ के दो बेटों ने अपनी जान गंवा दी। अपने परिवार का पेट पालने और थोड़ी बेहतर कमाई की उम्मीद में गांव से दूर गए भूपेंद्र भईना और दीपक रात्रे को आतंकियों ने बेहद करीब से गोली मार दी।
मृतक भूपेंद्र भईना सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के चुइया गांव के रहने वाले थे। वह पिछले 4-5 महीनों से कश्मीर में मजदूरी कर रहे थे। आतंकियों की गोली से गंभीर रूप से घायल भूपेंद्र ने शनिवार सुबह श्रीनगर के अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वह अपने पीछे पत्नी और तीन साल के मासूम बच्चे को छोड़ गए हैं।
भूपेंद्र के भाई अनुराग ने दर्द बयां करते हुए बताया कि उनके पास इतने पैसे और साधन नहीं हैं कि वे शव लाने कश्मीर जा सकें। माता-पिता की तबीयत भी ठीक नहीं है। इस वजह से भूपेंद्र का अंतिम संस्कार जम्मू-कश्मीर में ही अधिकारियों की मौजूदगी में किया जाएगा।
वहीं हमले में मौके पर ही दम तोड़ने वाले 24 वर्षीय दीपक रात्रे सक्ती जिले के बुंदेली गांव के निवासी थे। दीपक अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। वे अपनी पत्नी के साथ करीब आठ महीने पहले ईंट-भट्ठे पर काम करने गए थे और अपने 4 साल के बच्चे को गांव में ही छोड़ गए थे।
दीपक के परिजनों के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर मिलने वाली मजदूरी की तुलना में बाहर केवल 150 से 250 रुपये ही ज्यादा मिलते हैं। इसी थोड़ी सी एक्स्ट्रा कमाई के लिए वे बाहर गए थे। दीपक के पिता का बचपन में ही निधन हो गया था और उनका छोटा भाई दिव्यांग है, जिससे अब परिवार के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
घटना पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गहरा दुख जताया है। सीएम ने इस आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की और कहा कि राज्य सरकार पीड़ित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है। प्रभावित परिवारों को हर संभव आर्थिक और सामाजिक मदद दी जाएगी।









