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जिंदल कोल माइंस जनसुनवाई को फर्जी बताकर तमनार में 14 गांव के लोगों का तीसरे दिन भी धरना: औद्योगिक वाहनों की आवाजाही ठप, पहुंचे उमेश पटेल.. बोले, विधानसभा में उठेगा मुद्दा

रायगढ़: तमनार के गारे-पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक पर ग्रामीणों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा। जिंदल पावर लिमिटेड को आवंटित इस खदान की 8 दिसंबर को धौराभांठा में हुई जनसुनवाई को ग्रामीण ‘फर्जी और अवैध’ बता रहे हैं, जिसके विरोध में लिबरा के पास सीएचपी चौक पर शुक्रवार 12 दिसंबर से बेमियादी आर्थिक नाकेबंदी जारी है। आज रविवार को तीसरे दिन चल रहे धरने से औद्योगिक वाहनों की आवाजाही ठप है, जिससे 1.5 किमी लंबा जाम लग गया।

14 गांवों का एकजुट विरोध, पेसा एक्ट का हवाला

धौराभांठा, झिंकाबहाल, खुरूसलेंगा, समकेरा, लिबरा, बुडिया, बिजना, महलोई, आमगांव, टांगरघाट, झरना सहित 14 गांवों के हजारों ग्रामीण सड़क पर डटे हैं। वे आरोप लगाते हैं कि ग्राम सभा के विरोध पत्रों को नजरअंदाज कर गुप्त रूप से जनसुनवाई कराई गई, जिसमें सिर्फ कंपनी कर्मचारी और ठेकेदार शामिल थे। अनुसूचित क्षेत्र होने से पेसा एक्ट व पांचवीं अनुसूची के तहत ग्राम सभा की मंजूरी जरूरी थी, जो नहीं ली गई।

आंदोलन में शामिल हुईं विधायक विद्यावती सिदार

लैलूंगा विधायक विद्यावती कुंजबिहारी सिदार धरना स्थल पर पहुंचकर ग्रामीणों के साथ बैठीं और उनकी मांगों का समर्थन किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण मंडल रायपुर को पत्र भेजकर जनसुनवाई को संविधान विरोधी बताया।
उनका कहना है कि यह क्षेत्र अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में आता है, जहां पेसा एक्ट और पाँचवीं अनुसूची के अनुसार ग्राम सभा की अनुमति के बिना जनसुनवाई कराना अवैध है। सिदार ने यह भी कहा कि गारे-पेलमा परियोजना में वन अधिकार कानून का पालन नहीं किया गया।

उमेश पटेल ने दिया समर्थन, कहा– विधानसभा में उठेगा

मुद्दापूर्व मंत्री और खरसिया विधायक उमेश पटेल भी शनिवार को धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से मुलाकात कर कहा कि उनकी मांगें न्यायोचित हैं और इस विषय को वे विधानसभा में भी उठाएंगे।

तीन सूत्रीय मांगें

ग्रामीणों ने अपने आंदोलन के दौरान तीन प्रमुख मांगें रखी हैं –

8 दिसंबर की जनसुनवाई को निरस्त करने का लिखित आदेश जारी किया जाए।

आंदोलन के दौरान ग्रामीणों पर दर्ज एफआईआर वापस ली जाए और निलंबित कर्मचारियों को बहाल किया जाए।

कथित फर्जी जनसुनवाई कराने वाले अधिकारियों और कंपनी प्रतिनिधियों पर एफआईआर दर्ज कर न्यायिक जांच कराई जाए।

फिलहाल धरना स्थल पर बड़ी संख्या में महिला-पुरुष ग्रामीण डटे हुए हैं। औद्योगिक वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है, जिससे क्षेत्र का औद्योगिक परिवहन आंशिक रूप से प्रभावित हुआ है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, जबकि ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक शासन उनकी मांगें मान नहीं लेता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। तमनार पहले से प्रदूषित क्षेत्र है, जहां 9 खदानें चल रही हैं।

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