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रायगढ़ में जल संकट की आहट: पढ़े खास रिपोर्ट

रायगढ़। जिले में ऐसे उद्योगों की भरमार है, जो यहां के संसाधनों को दम भर निचोड़ कर उपयोग करते हैं। चाहे बात जमीन की हो या जमीन के भीतर की! खनिज की हो या पानी की! फिलहाल हम बात कर रहे हैं उद्योगों द्वारा लिए जाने वाले पानी की। जिसमें भूगर्भ जल के साथ, सतही जल का दोहन होता है। ताजा जानकारी के अनुसार उद्योगों से पानी का 100 करोड़ से ज्यादा का राजस्व वसूलने में जल संसाधन विभाग खुद गीला पीला हो गया है। एक तरफ यहां करोड़ों  की वसूली कर पाने में सिस्टम नतमस्तक है और वही दुसरी तरफ आम जनता को अमृत मिशन जैसी फेल योजना का भी बिल भेजा जाता है।

एक छोटा सा उदाहरण

ताजा मामला के अनुसार बीएस स्पंज घरघोड़ा मार्ग तराईमाल का जल संसाधन का बिल 45 लाख से ज्यादा बकाया है। ये बिल मई से सितंबर महीने के बीच का है। जिसमें 55133 घन मीटर पानी का उपयोग किया है। यह सिर्फ एक उद्योग द्वारा लिए जाने वाले पानी का हिसाब है।

जल संसाधन विभाग द्वारा जारी बीएस स्पंज के लिए बिल

अब आप कल्पना कीजिए कि जिले में ऐसे 73 छोटे बड़े उद्योग और हैं जो अथाह जल का दोहन कर रहे है। ये सिर्फ उस पानी का हिसाब है, जिसका रिकॉर्ड है। लेकिन इससे भी कहीं ज्यादा बोरवेल द्वारा भूजल का दोहन किया जाता है, एक छोटे से प्लांट में भी करीब दर्जन भर बोरवेल मिल जाएंगे, जो लगातार जमीन से पानी खींच रहे हैं।

नियम सिर्फ कागजी हाथी

देखा जाए तो उद्योगों के लिए बरसाती पानी के लिए रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य कर दिया गया है, जो धरातल में महज एक खाना पूर्ति है। उद्योगों को उनके ही गंदे पानी को रीसायकल कर उपयोग करने का भी आदेश है मगर खर्चे से बचने के लिए ये भी लगभग शून्य ही है। क्योंकि जब जमीन से फ्री का पानी मिल रहा है तो कौन गंदे पानी को साफ करने का खर्चा उठाएं।

भविष्य की स्थिति भयानक..?

विशेषज्ञों का कहना है कि उद्योगों द्वारा किए जा रहे इस भू जल के कारण आज की स्थिति यह है कि आज से 5 साल पहले जहां वाटर लेवल 40 फिट था, अब डेढ़ सौ फीट में भी पानी नहीं मिलता, कहीं-कहीं गांव में तो 400 फीट तक पानी के लिए बोरवेल की खुदाई करनी पड़ती है। अगर इसी तरह से भूजल का दोहन होता रहा तो आने वाले 10 साल के अंदर गांव के साथ-साथ शहरों में भी भू गर्भ पानी का जलस्तर 400 फीट औसत होगा।

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