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रायगढ़ जिले के असमय बुझ रहे युवा चिरागों का जिम्मेदार कौन..? कौन बचाएगा हमें.. हवा में बहते काले जहर और सड़कों पर बेलगाम दौड़ते यमदूतों से..??

रायगढ़@संजय पल्लू बेरीवाल। रायगढ़ जिला आज प्रदूषण के भारी चपेट में है ऐसे लगता है कि अब हम शहर गांवों में नहीं बल्कि उद्योग परिसर में प्रदूषण से निर्मित विकसित कॉलोनी में हमारा घर है और हम यहां के निवासी है।
किसी भी जिले के लिए विकास जरूरी है पर विकास के लिए विनाश कितना होगा यह भी आज आकलन करना एकदम आवश्यक है क्योंकि रायगढ़ जिले में विगत लगभग 20 वर्षों से जिस प्रकार कोयला खदानों एवं उद्योगों ने रफ्तार पकड़ी है। वह रफ्तार लगातार बढ़ती जा रही है.. कम होने का नाम नहीं ले रही है!

कौन लगाएगा रफ्तार पर लगाम?

किसी भी रफ्तार के लगाम के लिए एक मापदंड होना बहुत जरूरी है। हम कार मोटरसाइकिल भी चलाते हैं तो उसमें भी स्पीड मीटर का एक कांटा होता है जो कि निर्धारित स्पीड के बाद चालक के जीवन के लिए खतरे की घंटी साबित होती है। उसी प्रकार उद्योगों के लिए भी एक निश्चित स्पीड निर्धारित होनी चाहिए कि बस इसके बाद और उद्योग नहीं लगे.. परंतु जिस प्रकार से उद्योगों आज अपना विस्तार लगातार कर रहे हैं उससे तो जिले में असमय सड़क दुर्घटना, जानलेवा बीमारियों ने ऐसी मजबूत जड़े जमा ली है कि आज असमय ही किसी के भी घर का चिराग कभी भी सड़क दुर्घटना एवं गंभीर बीमारियों के चपेट में आकर बूझ जा रहा है तो इसके जिम्मेदार कौन है…?? कौन उनके परिवारों को उसके बाद परवरिश करेगा..??? आज यह समस्या बहुत विकराल रूप धारण कर चुकी है परंतु बहुत अफसोस है कि शासन और प्रशासन में बैठे जिम्मेदार लोगों ने इस पर अपनी आंखें चिरकाल के लिए बंद कर ली है।

विरोध बस जनसुनवाई के लिये..?

पर्यावरण के लिए लड़ने वाले या राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं या अन्य कोई भी उन्हें प्रदूषण की चिंता केवल उद्योगों के विस्तारिकरण के समय होने वाली जनसुनवाई के समय ही अत्यधिक सताने लगती है। समय रहते प्रदूषण नियंत्रण के लिए हमारे द्वारा ईमानदारी से प्रयास होता तो आज इन उद्योगों के मठाधीशों में इतना साहस नहीं होता कि वह रायगढ़ जिले में इतना विनाश कर पाते।

दिखावे की ईएसपी मशीने..

इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रीसिपिटेटर (ईएसपी) एक ऐसा उपकरण है, जिसका उपयोग धुएं और महीन धूल जैसे महीन कणों को हटाने के लिए किया जाता है। वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए यह सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला उपकरण है। इनका उपयोग इस्पात संयंत्रों और तापीय ऊर्जा संयंत्रों जैसे उद्योगों में किया जाता है यह उपकरण रायगढ़ जिले में ऊर्जा के लिए कोयला आधारित प्रायः सभी उद्योगों में लगा हुआ होगा और उसका पूरा उपयोग भी होता होगा..?? इस पर एक बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह है क्या यह कार्य ईमानदारी से उद्योग और पर्यावरण अधिकारी करवा रहे हैं..?

इसके बावजूद रायगढ़ में फ्लाई ऐश उड़ रहा है ,वायु में प्रदूषण बढ़ रहा है पानी गंदा से अति गंदा हो रहा है कैंसर, दमा, हृदयघात, चर्म रोग से संबंधित बीमारियों ने चारों ओर हाहाकार मचा रखा है इससे तो साफ जाहिर है कि या तो उसकी क्षमता कम है या फिर उसे मनमानी तरीके से चालू या बन्द किया जाता है नहीं तो इतना भयानक प्रदूषण हवा में कैसे फैल रहा है…?

रायगढ़ में सुबह की स्थिति

जिन उद्योगों की जनसुनवाई हो रही है उनके द्वारा किस क्षमता का ईएसपी एवं अन्य प्रदूषण नियंत्रक उपकरण लगाए जा रहे हैं अथवा लगाए गए है। उसकी जानकारी भी पूरी पारदर्शिता के साथ जन सामान्य को सुलभ कराई जानी चाहिए। इसके साथ ही रायगढ़ में उन सभी उद्योगों की जांच होनी चाहिए जहां पर ईएसपी लगी हुई है ताकि यह पता चल सके कि ईएसपी को कितना चलाया जा रहा है यदि इस कार्य को ईमानदारी से प्रशासन में बैठे जिम्मेदार और शासन के जनप्रतिनिधि इसे व्यक्तिगत समस्या मान कर उद्योगों में कार्यवाही को रोजाना करना चालू कर दे तो रायगढ़ में काफी हद तक प्रदूषण से नियंत्रण पाया जा सकता है।

खानापूर्ति नही ठोस कदम..

इस विषय पर ज़िले के सक्षम अधिकारी द्वारा सभी उद्योगपतियों एवं कोयला खदानों में कार्य करने वाले सभी संबंधित ठेकेदारों की बैठक बुलाकर साफ-साफ शब्दों में यदि दो टूक सुना दिया जाए की यदि जिले में एक निर्धारित माप दंड के ऊपर प्रदूषण फैलता है तो उसकी समस्त जवाबदारी आपके ऊपर तय की जाएगी और इसके लिए नियमानुसार कड़े से कड़े दंड दिए जाएंगे।

आज तक रायगढ़ जिले में दो चार कागजी कार्यवाही के उदाहरण को छोड़ दिया जाए तो जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा किस उद्योग के ऊपर प्रदूषण फैलाने के नाम पर तालाबंदी की कार्रवाई की गई है….?

कागजो में सब ठीक..??

जिले की वर्तमान कागजी परिस्थिति से तो यह प्रतीत होता है कि रायगढ़ में कोई प्रदूषण ही नहीं है और चारों ओर स्वच्छ निर्मल जल,, प्रदूषण रहित सांसों को तरोताजा करने वाली हवा चल रही है। धूल डस्ट फ्लाई ऐश का तो कही नामोनिशान जिले मे देखने को नहीं मिलता अरे साहब एक बार अपने चैंबर से निकलकर और रोजाना हो रहे अखबारों में प्रकाशित समाचार, सोशल मीडिया में प्रदूषण के खिलाफ आवाज, रोजाना दुर्घटनाओं के समाचार को पढ़कर ही संज्ञान ले लीजिए तो आपको रायगढ़ का प्रदूषण किस भयानक स्तर पर पहुंच गया है वह पता चल जाएगा! 

एक बार अपने वीटो पावर का इस्तेमाल कर चार उद्योगों में तालाबंदी की कार्रवाई कर दीजिए उसके बाद देखिए यह सब के सब अपने आप सीधे हो जाएंगे परंतु उसके लिए लोभ और मोह को छोड़कर ही कार्य किया जा सकता है।

-संजय पल्लू बेरीवाल

संजय पल्लू बेरीवाल

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