रायगढ़/सारंगढ़। रायगढ़ बड़े भंडार पुसौर स्थित अदानी पावर लिमिटेड की फ्लाई ऐश को रायगढ़ पर्यावरण विभाग द्वारा सारंगढ़ के महानदी के मुहाने स्थित ग्राम छोटा घोटला में डंपिंग की अनुमति दी गई है। लेकिन महानदी बाढ़ के बाद यह अनुमति पर्यावरण विभाग रायगढ़ के लिए गले का फांस बन गई है! अधिकारी भी अब जवाब देने से बच रहे हैं।
बाढ़ आई सब कुछ आया सामने
लोग बताते थे कि यहां पर सारा बैराज बनाने के लिए गिट्टी का उत्खनन हुआ था, जिसके कारण एक बड़ा गड्ढा हो गया है। जहां फ्लाई ऐश भरा जा रहा है। महानदी का जलस्तर बनने से या डंपिंग यार्ड जलमग्न हो गया और पानी खेतों तक घुस गया। जिससे खेती की उपजाऊ जमीन को भी भारी नुकसान हुआ है। अब हर किसी के मन में सवाल यह है कि इतने संवेदनशील क्षेत्र में पर्यावरण विभाग ने क्या सोचकर अनुमति दी..? क्या नियमों को ताक में रखा गया है..?अनुमति देते समय क्या पर्यावरण विभाग रायगढ़ ने जानबूझकर नियमों को नजरअंदाज या शिथिल (Relax) किया? आज इसी सवाल के जवाब पर विस्तार से चर्चा करेंगे और पूरे कानूनी पहलुओं को बारीकी से देखेंगे भी..

क्या मूल नियमों को दरकिनार किया गया?
पर्यावरण कानूनों के जानकारों के लिए यह सवाल महत्वपूर्ण है कि CECB ने इस स्थल पर फ्लाई ऐश डंपिंग की अनुमति किन तकनीकी और पर्यावरणीय मानकों के आधार पर दी..?
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की मार्च 2019 में जारी ‘निचले इलाकों और बंद खदानों/खदान गड्ढों में फ्लाई ऐश भराव संबंधी दिशा-निर्देश’ के Section 5.1.6 में स्पष्ट कहा गया है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र (Flood Plain Area) और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों (Ecologically Sensitive Areas) में फ्लाई ऐश से जमीन भरने या सुधारने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

राखड की रोकने लिए कोई व्यवस्था नहीं
इसी गाइडलाइन के Section 5.2.3 में यह भी कहा गया है कि यदि स्थल के आसपास या उसके भीतर कोई तालाब, जलाशय या अन्य जल निकाय मौजूद है, तो उसे फ्लाई ऐश के फैलाव और बारिश के पानी के साथ राख बहकर जाने से रोकने के लिए से बांध या कोई मजबूत व्यवस्था (Safety Embankment) की जानी चाहिए। जिससे कि यह राख को सीधे पानी या मिट्टी में मिलने से रोका जाए। लेकिन इस केस में ऐसा कुछ भी नहीं दिख रहा..? अगर ऐसा होता तो महानदी के पानी में यह राख नहीं घुलता और खेतों तक नहीं पहुंचता।

दूसरी ओर, अगर नियमों की बात की जाए केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) की 31 दिसंबर 2021 की फ्लाई ऐश के उपयोग संबंधी अधिसूचना (S.O. 5481(E)) में स्पष्ट रूप से, थर्मल पावर प्लांट पर फ्लाई ऐश के रखरखाव, भंडारण और निपटान को पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित तरीके से करने तथा हवा और पानी के प्रदूषण को रोकने के लिए सभी जरूरी सावधानियां बरतने की जिम्मेदारी तय की गई है। लेकिन लगता नहीं कि यहां पर्यावरण की परवाह की गई है..?
फिलहाल बाढ़ क्षेत्र को शिथिल करने वाला कोई नियम नहीं
इसके अलावा, 23 जनवरी 2026 को जारी केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के मसौदा S.O. 369(E) में भी 2019 की फ्लाई ऐश संबंधी दिशा-निर्देशों का संदर्भ बरकरार रखा गया है। इसमें भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फ्लाई ऐश डंपिंग की मनाही को खत्म करने वाला कोई नया प्रावधान दिखाई नहीं देता। बल्कि प्रस्तावित अमेंडमेंट में भी डंपिंग यार्ड की भौगोलिक स्थिति और उससे जुड़े पर्यावरणीय पहलुओं को ध्यान में रखकर ही अनुमति देने की बात कही गई है। लेकिन शायद यहां ऐसा नहीं किया गया अगर किया गया होता तो संवेदनशील क्षेत्र में, जहां बाढ़ के दौरान महानदी का पानी पहुंचता है, वहां अनुमति क्यों दे दी गई..?
स्थल निरीक्षण को लेकर भी सवाल
यह भी महत्वपूर्ण सवाल है कि इस डंप यार्ड को अनुमति देने से पहले क्या बाढ़ के खतरे, जलभराव और जल प्रदूषण से बचाव से जुड़े इन तकनीकी मानकों की मौके पर जांच की गई थी?
क्या CECB की तकनीकी टीम ने स्थल का निरीक्षण करते समय CPCB की 2019 की गाइडलाइन में दिए गए प्रावधानों का पालन किया गया था ?
ये मौन क्यों?
भले ही कागजों में बाढ़ क्षेत्र न दिखाया गया हो, लेकिन कुदरत (Nature) ने असली नक्शा सबके सामने रख दिया है। सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया और ग्राउंड की तस्वीरों, शिकायतों में साफ है कि महानदी का पानी सीधे डंपिंग यार्ड में घुसा है और जहरीली राख खेतों तक बह गई है। इस प्रत्यक्ष और भौगोलिक प्रमाण के बावजूद, पर्यावरण विभाग पिछले 10 दिनों से रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए है। अगर विभाग से वाकई कोई ‘तकनीकी गलती’ हुई है, तो उसे सुधारने के बजाय यह खामोशी क्यों?
आगे क्या…??
अब सबसे बड़ा और ज्वलंत सवाल यह है कि महानदी बाढ़ से प्रभावित इस डंप यार्ड में क्या पर्यावरण विभाग वहां डंपिंग की अनुमति जारी रखेगा? अगर इन सबके बावजूद वहां एक भी ट्रक राख डाली जाती है, तो उसे क्या पर्यावरण लिहाज से सुरक्षित माना जाए? यह एक सवाल है, जो सब जानना चाहते हैं!









